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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अक्सर लोग बदलते मौसम या सामान्य संक्रमण समझकर खांसी को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और आंकड़ों के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) एक साइलेंट किलर है, जिसके लक्षण शुरुआती दौर में बहुत स्पष्ट नहीं होते। अमेरिकन कैंसर सोसायटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बीमारी प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर की तुलना में अधिक घातक साबित होती है। यदि आपको लगातार खांसी की समस्या है, तो यह फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है।

धूम्रपान और बढ़ती उम्र: सबसे बड़े जोखिम कारक

सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर के अधिकांश मामले 65 वर्ष की आयु के बाद देखे जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान (Smoking) है, जो फेफड़ों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उन्हें भी इसका खतरा हो सकता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, रेडॉन (Radon) जैसी प्राकृतिक गैस भी इस बीमारी के प्रसार में बड़ी भूमिका निभाती है।

2-3 सप्ताह से अधिक की खांसी को न करें इग्नोर

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको खांसी है और वह दवाओं या घरेलू नुस्खों के बावजूद 21 दिनों (3 सप्ताह) से अधिक समय तक बनी रहती है, तो यह सामान्य संक्रमण नहीं हो सकता। मेमोरियलकेयर कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी रहने वाली खांसी फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम लक्षण है। शुरुआती चरणों में इसके लक्षण नहीं दिखते, जिससे बीमारी शरीर में फैलती रहती है और जब तक पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।

इन चेतावनी संकेतों पर भी रखें नजर

फेफड़ों का कैंसर केवल खांसी तक सीमित नहीं है। शरीर में अन्य बदलाव भी इसके संकेत हो सकते हैं:

खून की खांसी: थूक में खून आना एक गंभीर संकेत है।

अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास के वजन का तेजी से गिरना।

सीने में दर्द और सांस फूलना: गहरी सांस लेने या खांसने पर दर्द का बढ़ना।

आवाज में भारीपन: लंबे समय तक आवाज का बैठा रहना।

जांच और निदान: डॉक्टर की सलाह है अनिवार्य

यदि आप धूम्रपान करते हैं या पहले कर चुके हैं, तो आपको इन लक्षणों के प्रति अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, संदेह होने पर सबसे पहले छाती का एक्स-रे (Chest X-ray) या सीटी स्कैन (CT Scan) कराया जाता है। इन परीक्षणों के माध्यम से फेफड़ों में किसी भी प्रकार की गांठ या असामान्य बदलाव का पता लगाया जा सकता है। समय रहते पहचान और सही उपचार ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का एकमात्र तरीका है।