Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया में शांति बहाली की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुशनर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद भेज दिया है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। मंगलवार (21 अप्रैल, 2026) को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले ईरान के इस कड़े रुख ने कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
ईरान की दोटूक: "जब तक नाकाबंदी, तब तक कोई बात नहीं"
ईरानी समाचार एजेंसी 'तसनीम' के हवाले से अल जज़ीरा ने बताया है कि तेहरान ने अभी तक इस्लामाबाद के लिए अपना कोई प्रतिनिधिमंडल तय नहीं किया है। ईरान का कहना है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकाबंदी प्रभावी रहेगी, तब तक बातचीत की मेज पर बैठने का कोई मतलब नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा थोपी गई आर्थिक और नौसैनिक घेराबंदी के साये में कोई भी शांति वार्ता सफल नहीं हो सकती।
कुशनर और विटकॉफ पहुंचे इस्लामाबाद, जेडी वैंस वार्ता से बाहर
अमेरिकी पक्ष ने अपनी ओर से पूरी तैयारी कर ली है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर सोमवार रात ही इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि इस बार के शांति मिशन से उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस को बाहर रखा गया है। ट्रंप को उम्मीद है कि कुशनर का पिछला अनुभव और विटकॉफ की कूटनीति ईरान को समझौते की मेज तक लाने में कामयाब होगी।
समझौता नहीं तो विनाश: ट्रंप की सीधी धमकी
वार्ता पर मंडराते संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को विनाश की चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर ईरान इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो हम उनके सभी पुलों और बिजली संयंत्रों को मलबे के ढेर में बदल देंगे। बिना समझौते के वह पूरा देश तबाह हो जाएगा।"
क्या विफल हो जाएगी पाकिस्तान की मध्यस्थता?
पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पिछले सप्ताह हुई पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी। अब अगर मंगलवार को ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचता है, तो यह पाकिस्तान के शांति प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका होगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अगले 24 घंटों में कोई ऐसा कूटनीतिक रास्ता निकलेगा जिससे ईरान को बातचीत के लिए मनाया जा सके, या फिर खाड़ी देशों में युद्ध का नया और भीषण दौर शुरू होगा।
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