Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया का तनाव अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए भारत, मलेशिया और श्रीलंका के समुद्री जलक्षेत्र के पास कम से कम तीन ईरानी तेल टैंकरों को रोककर उनका रास्ता बदल दिया है। यह कार्रवाई अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वह ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना चाहता है।
भारत के दक्षिणी तट के पास 'डोरेना' पर बड़ी कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार, सबसे बड़ी कार्रवाई ईरानी सुपरटैंकर 'डोरेना' (Dorena) पर हुई है, जो लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था। इस जहाज को तीन दिन पहले दक्षिण भारत के तट के पास देखा गया था। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत ने इस टैंकर को रोककर इसकी सघन जांच की और इसे अपना मार्ग बदलने पर मजबूर कर दिया।
इसके अलावा दो अन्य टैंकरों, 'डीप सी' (Deep Sea) और 'सेविन' (Sevin) को भी निशाना बनाया गया है:
डीप सी: यह विशाल सुपरटैंकर मलेशियाई तट के पास देखा गया था।
सेविन: यह छोटा टैंकर अपनी क्षमता का लगभग 65% तेल ले जा रहा था, जिसे श्रीलंकाई जलक्षेत्र के पास इंटरसेप्ट किया गया।
क्यों हो रही है यह नाकाबंदी?
अमेरिका ने ईरान के तेल व्यापार पर सख्त प्रतिबंध लगाए हुए हैं। भारत समेत कई देशों को ईरानी तेल खरीदने के लिए जो विशेष छूट (Waiver) मिली थी, उसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है। इसी का नतीजा है कि ईरानी टैंकर 'डेर्या' (Derya) भारत में अपना तेल नहीं उतार सका और उसे वापस लौटना पड़ा। अमेरिका अब 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के आसपास एक अदृश्य 'दीवार' खड़ी कर चुका है ताकि ईरानी तेल बाजार तक न पहुंच सके।
समुद्री युद्ध में तब्दील होता संघर्ष
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, अब तक कुल 29 जहाजों को या तो वापस लौटने पर मजबूर किया गया है या उनका रास्ता बदल दिया गया है। तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत की ओर आ रहे एक जहाज पर गोलीबारी की और उसे जब्त कर लिया।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की इस आक्रामक कार्रवाई ने वैश्विक तेल बाजारों (Global Oil Markets) में खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समुद्री नाकाबंदी इसी तरह जारी रही, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। अमेरिका का स्पष्ट संकेत है कि वह 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है।
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