Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अब तक हमने सुना था कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया की 'तेल की नस' है, लेकिन अब यह इलाका पूरी दुनिया के डिजिटल अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण गोचर और गोलीबारी के बीच अब 'डेटा वॉर' (Data War) की आहट सुनाई दे रही है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की चेतावनी ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है—खतरा यह है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुँचा, तो अरब देशों समेत आधी दुनिया का इंटरनेट पूरी तरह ठप हो सकता है।
होर्मुज: डिजिटल कनेक्टिविटी का 'साइलेंट हब'
ज्यादातर लोग जानते हैं कि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है, लेकिन यह कम ही लोग जानते हैं कि यह रास्ता वैश्विक इंटरनेट का भी मुख्य द्वार है। खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ने वाली प्रमुख केबल प्रणालियाँ जैसे FALCON, AAE-1, TGN-Gulf और SEA-ME-WE इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरती हैं।
क्यों है यह 'महा-खतरा'?
ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज में डिजिटल बुनियादी ढांचा बेहद संवेदनशील स्थिति में है। इसके खतरे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
संकरा भौगोलिक क्षेत्र: सभी प्रमुख केबल एक ही छोटे से गलियारे में स्थित हैं। यहाँ एक छोटा सा विस्फोट या जानबूझकर की गई तोड़फोड़ दर्जनों देशों का संपर्क काट सकती है।
अत्यधिक निर्भरता: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब की बैंकिंग, क्लाउड सेवाएं और संचार इन्हीं केबलों पर टिके हैं।
मरम्मत में चुनौतियां: लाल सागर में 2024 और 2025 में केबल कटने की घटनाओं ने साबित किया है कि गहरे पानी में इनकी मरम्मत करने में महीनों लग जाते हैं।
ईरानी ड्रोन और डेटा सेंटर्स पर निशाना
खबरें हैं कि डिजिटल युद्ध केवल केबलों तक सीमित नहीं है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) से जुड़े डेटा केंद्रों पर ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब युद्ध केवल जमीन या तेल टैंकरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 'क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर' भी निशाने पर है।
क्या होगा अगर केबल कट गई?
यदि होर्मुज में इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जाता है, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:
बैंकिंग ठप: अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन और बैंकिंग प्रणालियां पूरी तरह फ्रीज हो जाएंगी।
संचार का अंत: देशों के बीच आधिकारिक और निजी संचार बंद हो जाएगा।
आर्थिक मंदी: खाड़ी देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था को रोजाना अरबों डॉलर का नुकसान होगा।
स्लो इंटरनेट: भारत जैसे पड़ोसी देशों में भी इंटरनेट की गति काफी धीमी हो सकती है क्योंकि डेटा ट्रैफिक को लंबे रूट से डायवर्ट करना पड़ेगा।
अदृश्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंडराता 'दृश्य' संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के नीचे बिछी ये केबलें 'अदृश्य' तो हैं, लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यमन के हाउथी विद्रोहियों द्वारा पहले किए गए हमलों ने यह साबित कर दिया है कि पानी के नीचे सुरक्षा प्रदान करना लगभग असंभव है। अब जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इंटरनेट का बंद होना महज एक अटकल नहीं, बल्कि एक डरावनी हकीकत बन सकता है।
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