Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बंजर भूमि पर बनी वक्फ मजार को लेकर हुआ विवाद अब राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गया है। मजार के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले में राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई, धार्मिक स्थल और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
कैसे उठा मामला राष्ट्रपति सचिवालय तक
पूर्व राज्यसभा सांसद आस मोहम्मद ने इस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि सूफी संत गनी शाह बाबा की मजार वर्षों पुरानी है और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। शिकायत के बाद राष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक शिवेंद्र चतुर्वेदी की ओर से यह मामला यूपी के मुख्य सचिव को अग्रेषित किया गया।
प्रशासन पर दबाव में कार्रवाई का आरोप
आस मोहम्मद का कहना है कि बीते कुछ समय से कुछ संगठनों द्वारा मजार हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दबाव में प्रशासन ने भूमि को सरकारी बंजर घोषित कर बुलडोजर चलाकर मजार के निर्माण को ढहा दिया। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अल्पसंख्यक आयोग भी हुआ सक्रिय
इस मामले में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन का कहना है कि आयोग को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने की तैयारी चल रही है।
प्रशासन का पक्ष क्या है
तहसील प्रशासन के अनुसार, गोरखपुर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के पास मेहड़ा नगर क्षेत्र में बनी यह मजार नान-जेड ए की बंजर भूमि पर बनाई गई थी।
वर्ष 1399 फसली की खतौनी में भूमि बंजर दर्ज
वर्ष 1993 में कथित फर्जी आदेश के आधार पर मजार व कब्रिस्तान का इंद्राज
जून 2025 में विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी की शिकायत पर इंद्राज निरस्त
यूपी राजस्व संहिता 2006 और आरबीओ एक्ट की धारा-10 के तहत अवैध निर्माण हटाने का आदेश
प्रशासन के मुताबिक 11 जनवरी 2026 को मजार समिति के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की मौजूदगी में गुंबद और अन्य निर्माण हटाए गए।
अब आगे क्या
मामला राष्ट्रपति सचिवालय, राज्य सरकार और अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंचने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता और प्रक्रिया पर गहन जांच की संभावना बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर राज्य सरकार का रुख और जांच रिपोर्ट अहम मानी जा रही है।




