Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका और इजराइल के साथ भीषण युद्ध के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रहा ईरान आखिर इतना महंगा युद्ध लड़ने के लिए धन कहां से जुटा रहा है? जहां एक तरफ मिसाइलों की बारिश हो रही है और तेल डिपो धू-धू कर जल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरानी अर्थव्यवस्था की धड़कनें अब भी चल रही हैं। जांच में सामने आया है कि ईरान ने युद्ध फंड जुटाने के लिए एक ऐसा 'अंडरग्राउंड' आर्थिक ढांचा तैयार किया है, जिसे भेद पाना पश्चिम के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
ड्रैगन का साथ: चीन खरीद रहा है 90% ईरानी तेल
ईरान की आय का सबसे मुख्य आधार आज भी 'काला सोना' यानी कच्चा तेल ही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को धता बताते हुए ईरान आज भी रोजाना लाखों बैरल तेल बेचकर करीब 14 करोड़ डॉलर (लगभग 1100 करोड़ रुपये) प्रतिदिन कमा रहा है। इस व्यापार का सबसे बड़ा खिलाड़ी चीन है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन को जा रहा है। चीन की छोटी और स्वतंत्र रिफाइनरियां (Teapot Refineries) सस्ते दामों पर ईरान से तेल खरीद रही हैं, जिससे ईरान की तिजोरी भर रही है और चीन को किफ़ायती ईंधन मिल रहा है।
'घोस्ट फ्लीट' और तस्करी का मायाजाल
प्रतिबंधों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ईरान ने 'घोस्ट फ्लीट' (Shadow Fleet) यानी फर्जी जहाजों का एक विशाल बेड़ा तैयार किया है। ये जहाज समुद्र के बीच में अपनी पहचान (AIS) छिपा देते हैं और मलेशिया या सिंगापुर जैसे देशों के झंडे लगाकर तेल की सप्लाई करते हैं। अक्सर समुद्र के बीचों-बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर (STS Transfer) किया जाता है, जिससे यह पता लगाना नामुमकिन हो जाता है कि तेल का असली स्रोत ईरान है। इस गुप्त रास्ते से होने वाली कमाई सीधे युद्ध के मोर्चे पर इस्तेमाल की जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की 'दुखती नस' से कमाई
ईरान के पास दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री नस 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का नियंत्रण है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान इस मार्ग का उपयोग अब राजस्व वसूलने के लिए कर रहा है। कुछ खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान यहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से 'सुरक्षा' के नाम पर भारी टोल वसूल रहा है। दावों के मुताबिक, प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक की वसूली की जा रही है, जो ईरान के लिए युद्ध के समय में एक बड़ा वित्तीय सहारा बन गया है।
भीतर से भी शिकंजा: IRGC का आर्थिक साम्राज्य
ईरान केवल बाहरी व्यापार पर निर्भर नहीं है, बल्कि देश के भीतर भी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अर्थव्यवस्था के हर बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है। निर्माण से लेकर दूरसंचार तक, IRGC की कंपनियां युद्ध फंड जुटाने में लगी हैं। घरेलू स्तर पर असंतोष को दबाने के लिए कड़े नियम लागू हैं, इंटरनेट पर पाबंदी है और सुरक्षा के लिए बच्चों तक को चौकियों पर तैनात किया जा रहा है। कुल मिलाकर, ईरान ने एक ऐसा सर्वाइवल मॉडल तैयार कर लिया है, जो युद्ध की भारी कीमत चुकाने के बावजूद उसे झुकने नहीं दे रहा है।




