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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को हिला देने वाला ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार या मदद मुहैया कराएंगे, अमेरिका उन पर तुरंत प्रभाव से 50 प्रतिशत टैरिफ (शुल्क) लगाएगा। ट्रंप का यह फैसला न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को भी बदलने वाला माना जा रहा है।

'नो रिलैक्सेशन': ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने मचाई खलबली

बुधवार को सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी तेवर साफ कर दिए। उन्होंने लिखा कि संयुक्त राज्य अमेरिका उन देशों को कतई नहीं बख्शेगा जिन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति को बढ़ाने में मदद की है। ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान को हथियार बेचने वाले देशों के अमेरिका आने वाले हर सामान पर 50% सीमा शुल्क वसूला जाएगा और इसमें किसी भी तरह की रियायत या छूट की गुंजाइश नहीं होगी। ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि ईरान में 'शासन परिवर्तन' (Regime Change) के बाद वे वहां यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकने और परमाणु अवशेषों को साफ करने पर काम करेंगे।

12 घंटे भी नहीं टिका युद्धविराम: हमलों से दहला मध्य पूर्व

हैरानी की बात यह है कि जिस युद्धविराम पर आज सुबह करीब 4:30 बजे सहमति बनी थी, वह 12 घंटे भी नहीं टिक सका। समझौते की स्याही सूखने से पहले ही ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लावन द्वीप पर स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी में भीषण विस्फोट हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने ईरानी तेल केंद्रों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं, जिससे शांति की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।

15 सूत्रीय फॉर्मूले पर चर्चा, लेकिन तनाव बरकरार

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों में छूट और टैरिफ को लेकर 15 बिंदुओं पर बातचीत चल रही है, जिनमें से कई पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, ईरान की तेल रिफाइनरियों पर हमलों और ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब "मैक्सिमम प्रेशर" की नीति पर वापस लौट आया है। लावन द्वीप पर हुआ हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है और इस विस्फोट ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का डर पैदा कर दिया है।

शांति वार्ता से पहले गहराया संकट

पाकिस्तान में आगामी दिनों में प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले हुई इस हिंसा ने राजनयिक प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या ट्रंप का यह 50% टैरिफ वाला दांव ईरान को हथियार देने वाले देशों को पीछे हटने पर मजबूर करेगा या फिर यह वैश्विक व्यापार युद्ध की एक नई शुरुआत होगी।