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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : क्या आप जानते हैं कि जिस नॉन-स्टिक पैन में आप कम तेल वाला 'हेल्दी' खाना बना रहे हैं, वही आपके परिवार की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है? अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की संयुक्त प्रबंध निदेशक संगीता रेड्डी ने नॉन-स्टिक कुकवेयर से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता जताते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने आगाह किया है कि इन बर्तनों पर आई एक मामूली सी खरोंच भी खाने में लाखों जहरीले कण घोल सकती है।

'हमेशा रहने वाले रसायन': शरीर में कभी नष्ट नहीं होते ये टॉक्सिन्स

संगीता रेड्डी के अनुसार, नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग में PFAS (पर- और पॉलीफ्लोरोअल्काइल पदार्थ) पाए जाते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में 'फॉरएवर केमिकल्स' (Forever Chemicals) कहा जाता है। इनकी सबसे डरावनी बात यह है कि एक बार शरीर में जाने के बाद ये कभी विघटित या नष्ट नहीं होते।

रेड्डी ने अपनी पोस्ट में लिखा:

"आप जानबूझकर अपने परिवार को प्लास्टिक का खाना कभी नहीं परोसेंगे, लेकिन एक खरोंच लगा हुआ नॉन-स्टिक पैन ठीक यही काम करता है। यह हमारे दैनिक भोजन में हजारों, बल्कि लाखों अदृश्य सूक्ष्म कण छोड़ सकता है।"

9,000 से लाखों कण: एक खरोंच की भारी कीमत

ग्लोबल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल रेमेडिएशन द्वारा 2022 में किए गए एक शोध में पाया गया कि टेफ्लॉन-लेपित (Teflon-coated) सतह पर मात्र एक छोटी सी खरोंच से 9,000 से अधिक माइक्रो और नैनोकण निकल सकते हैं। यदि बर्तन अधिक पुराना या घिसा हुआ है, तो इन कणों की संख्या लाखों तक पहुँच जाती है, जो सीधे आपके रक्तप्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश करते हैं।

कैंसर से लेकर बांझपन तक: बीमारियों की लंबी लिस्ट

इन रसायनों के संपर्क में आने से होने वाली बीमारियां केवल मामूली संक्रमण तक सीमित नहीं हैं। शोध इन कणों को सीधे तौर पर निम्नलिखित गंभीर समस्याओं से जोड़ रहे हैं:

कैंसर: विशेष रूप से गुर्दे (Kidney) और अंडकोष (Testicular) का कैंसर।

प्रजनन क्षमता: हार्मोनल असंतुलन और बांझपन (Infertility) का खतरा।

इम्युनिटी: रोग प्रतिरोधक क्षमता में भारी कमी और प्रतिरक्षा संबंधी विकार।

बच्चों पर असर: भ्रूण के विकास में बाधा और जन्म दोष।

PFOA का काला इतिहास और नई पीढ़ी के खतरे

2013 तक नॉन-स्टिक बर्तनों के निर्माण में PFOA (परफ्लूरोऑक्टानोइक एसिड) का धड़ल्ले से उपयोग होता था। कैंसर के खतरों की पुष्टि होने के बाद इस पर लगाम तो लगी, लेकिन अब इनकी जगह नई पीढ़ी के PFAS रसायनों ने ले ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नए रसायन भी पुराने रसायनों जितने ही खतरनाक साबित हो सकते हैं।

समाधान: क्या अब पुराने बर्तनों की ओर लौटने का समय है?

संगीता रेड्डी ने डर फैलाने के बजाय जागरूकता पर जोर देते हुए कुछ सुरक्षित विकल्प सुझाए हैं। स्वास्थ्य केवल अस्पतालों में नहीं, बल्कि हमारी रसोई के चुनाव से बनता है। सुरक्षित खाना पकाने के लिए आप इन विकल्पों को अपना सकते हैं:

स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel): यह खाना पकाने के लिए सबसे सुरक्षित और टिकाऊ विकल्पों में से एक है।

कच्चा लोहा (Cast Iron): यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि भोजन में आयरन की मात्रा भी बढ़ाता है।

मिट्टी के बर्तन: प्राकृतिक और रसायनों से मुक्त खाना पकाने का प्राचीन तरीका।

सिरेमिक कोटिंग: यदि नॉन-स्टिक ही इस्तेमाल करना है, तो उच्च गुणवत्ता वाली सिरेमिक कोटिंग (PFAS फ्री) का चुनाव करें।