Prabhat Vaibhav,Digital Desk : विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) एक बार फिर वनाग्नि की चपेट में है। पार्क के बफर जोन के अंतर्गत आने वाले मलारी भुजगड क्षेत्र के जंगलों में शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को दोबारा भीषण आग लग गई। हालांकि वन विभाग ने एक दिन पहले ही आग पर काबू पाने का दावा किया था, लेकिन शुक्रवार सुबह लपटें फिर से तेजी से फैलने लगीं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सूखी घास के कारण आग बुझाने में जुटे वन कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
बुझने के बाद फिर कैसे भड़की आग?
वन क्षेत्राधिकारी (Ranger) गौरव नेगी के अनुसार, गुरुवार शाम तक मलारी भुजगड क्षेत्र की आग को बुझा लिया गया था। लेकिन शुक्रवार सुबह चट्टानी ढलानों पर दबी चिंगारियों ने हवा के झोंकों के साथ फिर से विकराल रूप धारण कर लिया। यह क्षेत्र करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहाँ खड़ी चट्टानों और फिसलन भरी सतह के कारण पैदल पहुँचना और आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
'सूखा विंटर' बना विलेन: बर्फबारी की कमी से बढ़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार हिमालयी क्षेत्रों में हुई कम बर्फबारी और शुष्क सर्दियों (Dry Winter) के कारण जंगलों में नमी का अभाव है। जमीन पर बिछी सूखी घास और चीड़ की पत्तियां 'ईंधन' का काम कर रही हैं, जिससे मामूली चिंगारी भी बड़े दावानल में तब्दील हो रही है। नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के कई हिस्सों में इस साल जनवरी से ही आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो पर्यावरणविदों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
सुरक्षा घेरा: क्या 'फूलों की घाटी' सुरक्षित है?
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में आग मलारी क्षेत्र के बफर जोन तक सीमित है। फूलों की घाटी (Valley of Flowers) और हेमकुंड साहिब क्षेत्र फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिर भी, एहतियात के तौर पर भारतीय वायु सेना (IAF) के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टरों को जोशीमठ में स्टैंडबाय पर रखा गया है। यदि आग रिहायशी इलाकों या पार्क के कोर जोन की ओर बढ़ती है, तो 'वाटर बॉम्बिंग' (Water Bombing) के जरिए इसे बुझाने की योजना तैयार की गई है।
ग्रामीणों का आरोप और वन्यजीवों पर संकट
दूसरी ओर, आदिबद्री और बारतोली जैसे इलाकों के ग्रामीणों ने वन विभाग पर सुस्ती का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि धुआं अब गांवों तक पहुँच रहा है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस आग से न केवल बेशकीमती वन संपदा जल रही है, बल्कि कस्तूरी मृग और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है।




