Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के भातड़ गांव में गुलदार (तेंदुआ) का आतंक चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को उस वक्त गांव में हड़कंप मच गया जब एक गुलदार दिनदहाड़े गांव की घनी बस्ती को पार करते हुए बीच गांव में स्थित हनुमान मंदिर तक जा पहुंचा। गुलदार की इस निर्भीक चहलकदमी ने ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।
हनुमान मंदिर के आंगन में दिखा गुलदार
ग्रामीण चंद्रा पंत और हेमा पंत ने बताया कि शनिवार को गुलदार अचानक गांव के मध्य में आ धमका। वह मंदिर के पास तक पहुंच गया था। ग्रामीणों ने जब उसे देखा तो शोर मचाना शुरू किया। सामूहिक शोर-शराबे के बाद गुलदार किसी तरह वहां से जंगल की ओर भागा। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है; अब गुलदार हर दूसरे-तीसरे दिन कभी सुबह 6 बजे तो कभी शाम 5 बजे गांव के भीतर नजर आ रहा है।
डर के साये में बचपन और रोजी-रोटी
गुलदार की बढ़ती सक्रियता से गांव की महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक चिंतित हैं। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए बताया:
स्कूली बच्चे: सुबह के वक्त छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं, गुलदार की मौजूदगी से उनकी जान पर खतरा बना रहता है।
खेत और काम: महिलाएं घास-चारे के लिए खेतों में और पुरुष अपने काम पर बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
अप्रिय घटना का डर: ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते इसे नहीं पकड़ा गया, तो यह किसी बच्चे या बुजुर्ग को अपना निवाला बना सकता है।
वन विभाग ने शुरू की गश्त, ग्रामीणों से अपील
इस घटना के बाद ग्रामीण सुरेश चंद्र पंत ने प्रशासन से जल्द से जल्द पिंजरा लगाने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीडीहाट के रेंजर सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की एक टीम को भातड़ गांव भेज दिया गया है।
टीम की तैनाती: वन कर्मी गांव के आसपास और संवेदनशील रास्तों पर गश्त (Patrolling) करेंगे।
सावधानी की अपील: वन विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम के वक्त अकेले न निकलें, हाथ में लाठी रखें और घर के आसपास झाड़ियों की सफाई रखें।
फिलहाल, भातड़ गांव के लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। उनकी एकमात्र मांग है कि इस 'आदमखोर' होने की दहलीज पर खड़े गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ा जाए।




