Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब की होशियारपुर केंद्रीय जेल से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। जेल की सलाखों के पीछे बंद एक कैदी ने स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और कथित तौर पर सही इलाज न मिलने से परेशान होकर आत्मघाती कदम उठा लिया। कैदी ने जेल के भीतर ही लोहे की चार लंबी और नुकीली कीलें निगल लीं। जैसे ही इस घटना की जानकारी जेल वार्डन और अन्य अधिकारियों को हुई, पूरे कारागार परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कैदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
सिस्टम की बेरुखी ने कैदी को बनाया आत्मघाती
मिली जानकारी के अनुसार, उक्त कैदी पिछले कुछ समय से किसी बीमारी से जूझ रहा था और लगातार जेल प्रशासन से बेहतर इलाज की गुहार लगा रहा था। कैदी का आरोप था कि उसे जेल अस्पताल में वह चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है, जिसकी उसे दरकार है। बार-बार की मिन्नतों के बाद भी जब उसकी सुनवाई नहीं हुई, तो उसने गुस्से और हताशा में आकर जेल परिसर में ही पड़ी लोहे की चार नुकीली कीलें उठा लीं और उन्हें एक-एक कर निगल गया। इस घटना ने जेल के सुरक्षा प्रबंधों और कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर किए जाने वाले दावों की पोल खोल दी है।
जेल प्रशासन में मची अफरा-तफरी, जांच के आदेश
लोहे की कीलें निगलने की खबर जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, जेल के भीतर अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना जेल अधीक्षक को दी। कैदी को तत्काल कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानीय सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसके पेट से कीलें निकालने की कोशिश में जुटी है। डॉक्टरों का कहना है कि नुकीली कीलें शरीर के अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए स्थिति काफी नाजुक है। वहीं, जेल प्रशासन ने इस पूरे मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं कि आखिर कैदी के पास कीलें पहुंची कैसे और सुरक्षा में कहां चूक हुई।
जेल सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पंजाब की जेलों में कैदियों की मानसिक स्थिति और वहां मिलने वाली मेडिकल सुविधाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि कैदी बीमार था, तो उसे समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास क्यों नहीं भेजा गया? दूसरी ओर, जेल के अंदर लोहे की नुकीली कीलें आसानी से उपलब्ध होना भी एक बड़ी सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है। फिलहाल, पुलिस और जेल विभाग इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह कैदी द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश थी या वाकई सिस्टम की अनदेखी ने उसे मरने पर मजबूर किया।
_1274519000_100x75.jpg)
_1741447747_100x75.jpg)
_1702992253_100x75.jpg)
_2023034781_100x75.jpg)
_699823697_100x75.jpg)