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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान गांधीनगर स्थित प्रसिद्ध कोबा तीर्थ में 'सम्राट संप्रति संग्रहालय' (Samrat Samprati Museum) का भव्य उद्घाटन किया। भगवान महावीर स्वामी की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने जैन विरासत और प्राचीन भारतीय दर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्राट संप्रति ने न केवल सत्ता संभाली, बल्कि भारत के गहन दर्शन को आम जनजीवन के व्यवहार से जोड़कर समाज को नई दिशा दी।

कोबा तीर्थ: आध्यात्मिक शांति और ज्ञान का आधुनिक केंद्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि कोबा तीर्थ आज के समय में आध्यात्मिक शांति का एक बड़ा प्रतीक बन गया है। पीएम के अनुसार, यह स्थान केवल एक तीर्थ नहीं है, बल्कि यहां जैन संतों और ऋषियों के तप से मूल्यों का संरक्षण और ज्ञान का पोषण होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नया संग्रहालय भारत की भव्यता और सांस्कृतिक विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण है।

सम्राट संप्रति: सत्ता को सेवा और साधना मानने वाले शासक

पीएम मोदी ने मौर्य वंश के महान सम्राट संप्रति के जीवन दर्शन की सराहना करते हुए कहा, "एक तरफ इतिहास में ऐसे शासक हुए जिन्होंने हिंसा को सत्ता का हथियार बनाया, वहीं दूसरी ओर सम्राट संप्रति ने सिंहासन पर बैठते ही अहिंसा, सत्य और अनासक्ति के सिद्धांतों का प्रचार किया।" उन्होंने बताया कि सम्राट संप्रति ने शक्ति को हमेशा 'सेवा और साधना' के रूप में देखा। आज का यह आधुनिक संग्रहालय उन्हीं शाश्वत मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक पवित्र माध्यम बनेगा।

वैश्विक अशांति के बीच भारत का 'अहिंसा' मंत्र

दुनिया के मौजूदा हालातों और मध्य पूर्व (Middle East) के संकट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब विश्व में अस्थिरता और अशांति फैली है, तब भारत का अहिंसा का दर्शन ही समाधान की राह दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत में ज्ञान का प्रवाह कभी नहीं रुका। हर युग में तीर्थंकरों और ऋषियों ने इस ज्ञान भंडार को समृद्ध किया है। यह संग्रहालय जैन धर्म के सहस्राब्दी पुराने ज्ञान और सदियों की प्रेरणाओं को आधुनिक रूप में सहेजने का एक अद्वितीय प्रयास है।

जैन संतों के विजन की सराहना

प्रधानमंत्री ने इस भव्य संग्रहालय की स्थापना के लिए जैन संतों और विद्वानों की दूरदर्शिता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संतों ने भारत की प्राचीन विरासत को अमर बनाने का जो संकल्प लिया था, वह आज साकार हो रहा है। यह संग्रहालय न केवल जैन धर्मावलंबियों के लिए बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। कार्यक्रम के दौरान पीएम ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को दोहराते हुए समावेशी प्रगति की बात कही।