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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सुरक्षा और व्यापारिक हितों को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवतनेनी हरीश ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को वैश्विक व्यापार की 'जीवन रेखा' बताते हुए इसे सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

भारतीय नाविकों की शहादत पर भारत सख्त

भारत की ओर से यह बयान तब आया है जब इस संघर्ष के दौरान कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें काम करने वाले निर्दोष भारतीय नाविकों ने अपनी जान गंवाई है। परवतनेनी हरीश ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों और नागरिक जहाजों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई इस शत्रुता ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: क्यों महत्वपूर्ण है यह समुद्री मार्ग?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक जलमार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, जिससे होकर दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की अधिकांश ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। भारत ने UN में स्पष्ट किया कि इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा या धमकी न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी 'अस्वीकार्य' है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान

भारत ने सभी देशों, विशेषकर अमेरिका और ईरान से संयम बरतने की अपील की है। भारत का मानना है कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना हर देश की जिम्मेदारी है। हरीश ने कहा, "किसी भी मतभेद को सुलझाने का रास्ता युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति है।" भारत ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (International Maritime Law) का सम्मान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वैश्विक व्यापार निर्बाध रूप से चलता रहे।

नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील

UN में भारत ने यह भी कहा कि इस युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान नागरिकों का हो रहा है। भारत ने सभी पक्षों से आक्रामक कार्रवाई तुरंत बंद करने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया है। भारत का यह 'अल्टीमेटम' यह संकेत देता है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और अपने नागरिकों (नाविकों) की सुरक्षा के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।