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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने दुनिया भर की कूटनीतिक हलचलों को तेज कर दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को सभी को चौंकाते हुए दक्षिणी लेबनान के अग्रिम मोर्चों का दौरा किया। भारी सुरक्षा घेरे और बुलेटप्रूफ जैकेट में नजर आए नेतन्याहू ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान अभी रुकने वाला नहीं है।

युद्धक्षेत्र से सीधी हुंकार: 'हिजबुल्लाह का खतरा किया नाकाम'

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में नेतन्याहू नकाबपोश सैनिकों और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ के साथ लेबनान के भीतर स्थित 'सुरक्षा क्षेत्र' में दिखाई दे रहे हैं। सैनिकों का हौसला बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने इस सुरक्षा क्षेत्र के माध्यम से लेबनान से होने वाले हिजबुल्लाह के हमलों के खतरे को पूरी तरह नाकाम कर दिया है। हमारी सेना यहां मुस्तैदी से डटी हुई है।"

'कोई युद्धविराम नहीं': हमलों में आएगी और तेजी

नेतन्याहू ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें युद्धविराम की बात कही जा रही थी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। हम हिजबुल्लाह पर पूरी ताकत से हमले जारी रखेंगे। जब तक उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा बहाल नहीं हो जाती, हमारी बंदूकें खामोश नहीं होंगी।" इस बयान के तुरंत बाद इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान में हिजबुल्लाह के कई लॉन्च पैड्स पर ताजा हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।

सीधी बातचीत और शांति समझौते का प्रस्ताव

एक तरफ जहां युद्ध जारी रखने की बात कही गई, वहीं नेतन्याहू ने बातचीत के द्वार खोलने का भी संकेत दिया। उन्होंने कैबिनेट को लेबनान सरकार के साथ सीधी बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है। इस बातचीत के पीछे नेतन्याहू ने दो बड़े लक्ष्य रखे हैं:

हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण: लेबनान के भीतर सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन के हथियारों को पूरी तरह खत्म करना।

ऐतिहासिक शांति समझौता: इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐसा स्थाई शांति समझौता करना जो आने वाली पीढ़ियों तक मिसाल बने।

1948 से चल रहा तकनीकी युद्ध

गौरतलब है कि साल 1948 में इजरायल की स्थापना के समय से ही इजरायल और लेबनान तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं। नेतन्याहू का यह दौरा और शांति समझौते की बात एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है, लेकिन वर्तमान में जारी भीषण गोलाबारी और सैन्य तनाव ने किसी भी समझौते की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।