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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिसे ईरान ने सीधे तौर पर युद्ध का निमंत्रण माना है। शाम 7:30 बजे की समय सीमा समाप्त होते ही अमेरिकी जंगी जहाजों ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले रास्तों को ब्लॉक कर दिया है। अब दुनिया के सामने सवाल यह है कि क्या 2026 में एक और विनाशकारी महायुद्ध शुरू होने वाला है?

ट्रंप की क्रूर चेतावनी: 'करीब आए तो उड़ा दिए जाओगे'

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे खौफनाक धमकी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नाकाबंदी के दौरान यदि कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नौसेना के घेरे के पास आता है, तो उसे बिना किसी चेतावनी के नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा, "यह कार्रवाई वैसी ही क्रूर होगी जैसी नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ की जाती है।" अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन वर्तमान में अरब सागर में तैनात है, जो चीन और अन्य एशियाई देशों से ईरान जाने वाले जहाजों के लिए एक अभेद्य दीवार बन गया है।

ईरान का पलटवार: 'बंदरगाह सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं'

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए घोषणा की है कि उनके 10 लाख सैनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष कलिबफ ने गरजते हुए कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और इस बार भी युद्ध का जवाब युद्ध से दिया जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उनके तेल निर्यात को रोका गया, तो वे खाड़ी के किसी भी बंदरगाह को सुरक्षित नहीं रहने देंगे।

ईरान के निशाने पर सऊदी और यूएई के तेल बंदरगाह

सोशल मीडिया पर 'ईरानी लक्ष्यों' की एक संभावित सूची वायरल हो रही है, जिसने खाड़ी देशों में खलबली मचा दी है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह सऊदी अरब के रस तनुरा रिफाइनरी, यूएई के फुजैराह पोर्ट और बहरीन के खलीफा बिन सलमान पोर्ट पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है। ईरान का सीधा संदेश है— "अगर हम तेल नहीं बेच पाएंगे, तो दुनिया में कोई भी तेल का व्यापार नहीं कर पाएगा।"

ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप से झाड़ा पल्ला

हैरानी की बात यह है कि इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन इस नाकाबंदी में शामिल नहीं है और न ही वह इसका समर्थन करता है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप का साथ देने से इनकार कर दिया है। पश्चिमी देशों के बीच इस फूट ने खाड़ी संकट को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

तेल की वैश्विक आपूर्ति पर संकट के बादल

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस नाकाबंदी का सबसे बड़ा असर ईरान के खार्ग द्वीप पर पड़ेगा, जहाँ से ईरान की 90% तेल आपूर्ति होती है। अगर यह गतिरोध अगले कुछ घंटों तक जारी रहा, तो वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन का हाहाकार मच जाएगा।