Prabhat Vaibhav, Digital Desk : होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। इस्लामाबाद में पहले दौर की वार्ता विफल होने और डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक तेवरों के बाद अब खबर आ रही है कि अमेरिका और ईरान वार्ता के दूसरे दौर के लिए मेज पर लौट सकते हैं। 21 अप्रैल को युद्धविराम की समय सीमा समाप्त हो रही है, और उससे पहले किसी समझौते पर पहुंचना दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हो गया है।
21 अप्रैल से पहले 'आर-पार' की बैठक संभव
सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अधिकारी आंतरिक रूप से ईरानी अधिकारियों के साथ दूसरी बैठक की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। दो सप्ताह का युद्धविराम खत्म होने को है और अमेरिका ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि यदि बात नहीं बनी, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकाबंदी कर दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने से पहले अधिकारी जल्द से जल्द किसी ठोस समझौते पर पहुंचना चाहते हैं।
तुर्की बन सकता है 'शांति का मैदान', मध्यस्थों की बड़ी भूमिका
इस्लामाबाद की 21 घंटे लंबी मैराथन बैठक बेनतीजा रहने के बाद अब वार्ता के अगले दौर के लिए तुर्की का नाम सबसे आगे चल रहा है। तुर्की, मिस्र, ओमान और पाकिस्तान जैसे देश दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इससे पहले जिनेवा, वियना और इस्तांबुल जैसे शहरों पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन अब इस्तांबुल में अगली बैठक होने की प्रबल संभावना है।
ट्रंप का दावा: "समझौते के लिए ईरान खुद कर रहा है संपर्क"
सोमवार को एक सनसनीखेज बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने खुद वाशिंगटन से संपर्क साधा है। ट्रंप के अनुसार, आर्थिक दबाव और नाकाबंदी के डर से ईरानी नेतृत्व किसी भी कीमत पर समझौता चाहता है। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके प्रशासन को ईरान की ओर से फोन कॉल भी आए हैं। ट्रंप के कई करीबी सलाहकार भी सैन्य हमले के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अमेरिकी जनता अब एक और लंबे युद्ध को झेलने के मूड में नहीं है।
ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और बढ़ता गतिरोध
भले ही बातचीत की मेज सज रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत तनावपूर्ण है। अमेरिका ने सोमवार से ही ईरानी बंदरगाहों को अवरुद्ध करना शुरू कर दिया है। ईरान अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है और वह अमेरिका की सख्त शर्तों को मानने के मूड में नहीं दिख रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो युद्धविराम की समय सीमा को कुछ और दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है।




