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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी महायुद्ध जैसे हालातों के बीच भारत के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है। जहां एक ओर अमेरिका ने ईरान की पूरी तरह से घेराबंदी (Blockade) कर दी है, वहीं दूसरी ओर तेहरान ने भारत के साथ अपनी दोस्ती का मान रखते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई भी 'टोल टैक्स' या शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

राजदूत का बड़ा बयान: 'भारत हमारा सबसे भरोसेमंद साथी'

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने दिल्ली स्थित दूतावास में पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ किया कि भारतीय जहाजों के लिए होर्मुज का रास्ता न केवल खुला रहेगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा। उन्होंने कहा, "आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई पैसा वसूला है? हमारे संबंध इन कठिन समय में भी बेहद मजबूत और भरोसेमंद बने हुए हैं।"

अमेरिकी नाकाबंदी के बीच सुरक्षित मार्ग की गारंटी

ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकाबंदी की घोषणा कर दी है। कयास लगाए जा रहे थे कि ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से भारी टैक्स वसूल सकता है, लेकिन भारत को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है। ईरानी राजदूत ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही एक ऐसा सिस्टम (Mechanism) तैयार करेंगे जिससे भारतीय जहाजों का आवागमन और भी सुगम हो सके।

फंसे हुए 15 भारतीय जहाजों की घर वापसी की तैयारी

एक तरफ कूटनीतिक जीत दिख रही है, तो दूसरी तरफ समुद्र में फंसे भारतीयों को निकालने का अभियान भी तेज हो गया है। भारत के जलमार्ग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य में 15 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इन जहाजों और उन पर सवार क्रू मेंबर्स की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

ट्रंप की नीति पर दुनिया में फूट: ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने खींचे हाथ

दिलचस्प बात यह है कि ईरान के खिलाफ ट्रंप की इस 'नेवल नाकाबंदी' को वैश्विक स्तर पर वैसा समर्थन नहीं मिल रहा है जैसा अमेरिका ने उम्मीद की थी। ब्रिटेन ने खुले तौर पर कह दिया है कि वह इस नाकाबंदी का हिस्सा नहीं बनेगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भी इस मामले में अमेरिका से कोई औपचारिक संदेश मिलने की बात से इनकार करते हुए खुद को दूर कर लिया है। पश्चिमी देशों की इस आपसी खींचतान ने भारत जैसे देशों के लिए ईरान के साथ सीधे संवाद के रास्ते खोल दिए हैं।