Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग के बीच दुनिया की नजरें अब भारत पर टिक गई हैं। जर्मनी के दौरे पर गए भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि भारत इस वैश्विक संकट को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राजनाथ सिंह के इस बयान ने उन अटकलों को तेज कर दिया है कि क्या भारत अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ (Mediator) बनकर उभरेगा।
पीएम मोदी ने ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति से की सीधी बात
रक्षा मंत्री ने जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में व्यक्तिगत रूप से सक्रिय हैं। पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजकस्खान से फोन पर लंबी बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान भारत ने दोनों देशों से युद्ध विराम की अपील करते हुए कूटनीतिक समाधान निकालने पर जोर दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति हमेशा संतुलित रही है और भारत ने अपनी तरफ से शांति की पूरी कोशिश की है।"
इस्लामाबाद वार्ता रही विफल: 21 घंटे की चर्चा के बाद भी नतीजा सिफर
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी। इस बैठक में अमेरिका की ओर से जे.डी. वैंस और ईरान की ओर से एम.बी. गालिबफ ने नेतृत्व किया। लगभग 21 घंटे तक चली मैराथन बैठकों के बावजूद दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके। वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन लौट गया, जिससे शांति की उम्मीदों को झटका लगा था।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा युद्धविराम
भले ही इस्लामाबाद की बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक राहत भरा कदम उठाया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के अनुरोध पर ट्रंप ने फिलहाल युद्धविराम (Ceasefire) को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि यह ईरान को एक ठोस प्रस्ताव के साथ मेज पर वापस आने का मौका देने की कोशिश है। हालांकि, वार्ता का दूसरा दौर टलने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत का दखल इस गतिरोध को तोड़ सकता है।
क्या सही समय आ गया है? राजनाथ सिंह का भविष्य की ओर इशारा
जब राजनाथ सिंह से पूछा गया कि क्या भारत आधिकारिक तौर पर मध्यस्थ बनेगा, तो उन्होंने सधे हुए अंदाज में कहा, "हर चीज का एक सही समय होता है। कल ऐसा समय आ सकता है जब भारत इस संकट को सफलतापूर्वक सुलझाने में अपनी भूमिका निभाएगा।" उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भारत पर्दे के पीछे से लगातार काम कर रहा है और आने वाले दिनों में नई दिल्ली से कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।




