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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों को आज उस वक्त करारा झटका लगा, जब ओमान के तट से महज 15 समुद्री मील दूर एक मालवाहक जहाज पर भीषण हमला हुआ। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एक गनबोट ने इस हमले को अंजाम दिया है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ट्रंप द्वारा 'सीजफायर' बढ़ाए जाने के बावजूद समंदर में बारूद की गंध अभी कम नहीं हुई है।

जहाज के कप्तान की जुबानी: 'बिना वॉर्निंग शुरू कर दी गोलीबारी'

हमले का शिकार हुए जहाज के कप्तान ने बताया कि ईरानी गनबोट अचानक जहाज के करीब आई और बिना किसी रेडियो चेतावनी या संकेत के सीधे फायरिंग शुरू कर दी।

ब्रिज को नुकसान: हमले में जहाज के 'ब्रिज' (कंट्रोल रूम) को भारी क्षति पहुंची है।

चालक दल सुरक्षित: राहत की बात यह है कि हमले में चालक दल का कोई भी सदस्य घायल नहीं हुआ है और न ही जहाज में आग लगने या तेल रिसाव की कोई खबर है।

UKMTO की एडवाइजरी: इस घटना के बाद ओमान और अरब सागर के इस रूट से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों को 'हाई अलर्ट' पर रहने की सलाह दी गई है।

क्यों भड़का है ईरान? हमलों और पलटवार का सिलसिला

अल जज़ीरा और प्रेस टीवी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले 48 घंटों से जारी 'समुद्री जंग' का नतीजा है:

20 अप्रैल का ड्रोन हमला: ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन से हमला किया था। ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उनके एक व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी गोलीबारी के जवाब में की गई थी।

अमेरिकी नाकेबंदी और 'समुद्री डकैती' का आरोप: ईरान के 'हजरत खातम अल-अनबिया' सैन्य मुख्यालय ने अमेरिका पर 'सशस्त्र समुद्री डकैती' का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी नौसेना उनके बंदरगाहों की नाकेबंदी कर सीजफायर का उल्लंघन कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद: जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा: 'नियम तोड़े इसलिए रोका'

दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने एक अलग ही कहानी बयां की है। CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्राउंस (USS Spruance) ने अरब सागर में एक ईरानी जहाज 'TOUSKA' को इसलिए रोका क्योंकि उसने अंतरराष्ट्रीय नाकाबंदी के नियमों का उल्लंघन किया था। अमेरिका का कहना है कि वे केवल प्रतिबंधित हथियारों और सामग्री की तस्करी रोकने के लिए जांच कर रहे हैं।

सीजफायर के बाद भी 'सब कुछ सामान्य नहीं'

भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद हमले रोकने का निर्देश दिया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है:

आर्थिक युद्ध: अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई है, जिसे ईरान अपनी अर्थव्यवस्था पर हमला मान रहा है।

व्यापार पर असर: ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में टैंकरों की कतारें लगी हुई हैं। बीमा कंपनियों ने इस रूट के लिए प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चीजों के दाम बढ़ना तय है।