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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देश के विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) न केवल भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि यह कनेक्टिविटी के मामले में भी दुनिया के बेहतरीन एयरपोर्ट्स को पछाड़ने की तैयारी में है। सड़क, रेल, मेट्रो और हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन के एकीकृत नेटवर्क से जुड़कर जेवर एयरपोर्ट अब उत्तर भारत का असली 'एविएशन हब' बनने जा रहा है। इसके शुरू होने से अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोगों को इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट के जाम और भीड़ में फंसने की मजबूरी नहीं रहेगी।

सड़कों का बिछेगा जाल: गाजियाबाद, मेरठ और हरियाणा से होगी सीधी एंट्री

जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसका सड़क नेटवर्क है। इसे सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, जहां एक समर्पित इंटरचेंज तैयार है। इसके अलावा:

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: बल्लभगढ़ लिंक के जरिए दक्षिण हरियाणा और पश्चिमी भारत से सीधी पहुंच सुनिश्चित की गई है।

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे: इसका इंटरचेंज गाजियाबाद, मेरठ, पलवल और सोनीपत के यात्रियों के लिए जेवर तक का रास्ता आसान बना देगा।

सेक्टर-28 कनेक्टिविटी: स्थानीय ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए सेक्टर-28 में 60 मीटर चौड़ी सर्विस रोड को सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है।

रैपिड रेल और बुलेट ट्रेन: मिनटों में तय होगा सफर

रेलवे और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी जेवर एयरपोर्ट को 'ग्लोबल' बनाएगी। दिल्ली से जेवर को जोड़ने वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना का ब्लूप्रिंट तैयार है। सबसे रोमांचक पहलू दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) लाइन है, जिसमें जेवर टर्मिनल पर एक विशेष स्टेशन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, चोला-रुंधी रेल लाइन के जरिए इसे मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।

500 इलेक्ट्रिक बसें और ब्रांडेड कैब: सफर होगा सुगम और सुरक्षित

सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) ने कमर कस ली है। जल्द ही जेवर से उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए अंतरराज्यीय बस सेवाएं शुरू होंगी। पर्यावरण का ध्यान रखते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा (YEIDA) मिलकर 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाएंगे। यात्रियों की सुरक्षा के लिए 'NIA ब्रांडेड कैब' सेवा शुरू होगी, जिसे महिंद्रा लॉजिस्टिक्स संचालित करेगा। साथ ही उबर, ओला और मेकमायट्रिप जैसी कंपनियां ऑन-डिमांड टैक्सी और सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल की सुविधा भी देंगी।

दिल्ली एयरपोर्ट का बोझ होगा कम; यात्रियों की बढ़ेगी सहूलियत

वर्तमान में उत्तर भारत के लोगों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पूरी तरह दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे वहां यात्रियों का भारी दबाव रहता है। जेवर एयरपोर्ट के पूरी तरह क्रियाशील होने से यह दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। अब पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के यात्री सीधे जेवर पहुंचकर वैश्विक उड़ानें भर सकेंगे। यह एयरपोर्ट न केवल समय बचाएगा बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास का नया इंजन भी साबित होगा।