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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : तीर्थ नगरी सोरों (सूकर क्षेत्र) की धार्मिक और पौराणिक पहचान अब और अधिक भव्य होने जा रही है। शासन ने सोरों स्थित सुप्रसिद्ध हरिपदी गंगा घाट के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए 15.31 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घाट को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और इसे एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

भगवान वराह की मोक्षस्थली का बदलेगा स्वरूप

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सोरों वह पावन स्थल है जहाँ भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह ने मोक्ष प्राप्त किया था। यहाँ का हरिपदी गंगा घाट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ अपनी मनोकामनाएं लेकर स्नान और पूजन के लिए आते हैं।

सौंदर्यीकरण योजना की मुख्य विशेषताएं

शासन द्वारा स्वीकृत बजट से घाट पर निम्नलिखित अत्याधुनिक कार्य कराए जाएंगे:

श्रद्धालु सुविधाएं: महिलाओं की निजता का ध्यान रखते हुए आधुनिक चेंजिंग रूम बनाए जाएंगे।

आकर्षण: घाट पर खूबसूरत फव्वारे, भव्य लाइटिंग और आकर्षक वाल पेंटिंग की जाएगी जो सोरों के इतिहास को दर्शाएगी।

विश्राम स्थल: घाटों पर कलात्मक छतरियों का निर्माण किया जाएगा ताकि श्रद्धालु धूप और बारिश से बच सकें।

सुरक्षा और व्यवस्था: अव्यवस्थित घाटों को व्यवस्थित कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाएगा, जिससे स्नान के दौरान हादसों का खतरा कम होगा।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने बताया कि इस परियोजना का क्रियान्वयन सीएनडीएस (CNDS) द्वारा किया जाएगा और पर्यटन विभाग इसकी निगरानी करेगा।

रोजगार के अवसर: घाट के आधुनिक होने से यहाँ पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय दुकानदारों, गाइडों और हस्तशिल्पियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

तकनीकी सहयोग: परियोजना में सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था के लिए जल निगम का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है ताकि घाट और जल की स्वच्छता बनी रहे।

सोरों का समग्र विकास

प्रशासन केवल हरिपदी घाट तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारी के अनुसार, सोरों के अन्य पौराणिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी शासन को भेजे गए हैं। दरियावगंज झील के कायाकल्प का कार्य भी शुरू हो चुका है। सरकार का विजन सोरों को अयोध्या और मथुरा की तर्ज पर एक प्रमुख धार्मिक हब के रूप में विकसित करना है।