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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के रसोई घरों पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश में एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस डीलर्स की ओर से आए हालिया आंकड़ों ने सरकार और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि तेल कंपनियों की ओर से की गई कटौती के कारण राज्य में मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है, जिससे आने वाले दिनों में सिलिंडर की किल्लत और अधिक गंभीर हो सकती है।

कोटे में बड़ी कटौती से बिगड़ा सप्लाई का गणित

पंजाब के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स और डीलर्स एसोसिएशन के दावों के मुताबिक, राज्य को मिलने वाली गैस आपूर्ति में करीब 20 फीसदी की सीधी कटौती की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जहां प्रदेश में हर महीने औसतन 27 लाख सिलिंडरों की आपूर्ति होती थी, वहीं अब यह घटकर महज 21 लाख सिलिंडर रह गई है। यानी सीधे तौर पर 6 लाख सिलिंडरों की कमी पैदा हो गई है। इस कटौती का सीधा असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की वितरण प्रणाली पर पड़ रहा है, जिससे बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में काफी देरी हो रही है।

डीलर्स का दावा: बैकलॉग संभालना हुआ नामुमकिन

गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि सप्लाई कम होने की वजह से रोजाना पेंडिंग बुकिंग की संख्या बढ़ती जा रही है। डीलर्स का कहना है कि जब पीछे से ही माल कम आ रहा है, तो वे उपभोक्ताओं की मांग कैसे पूरी करें? कई इलाकों में तो हालात यह हैं कि उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए एक हफ्ते से दस दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियों ने तुरंत सप्लाई बहाल नहीं की, तो राज्य में गैस की भारी कालाबाजारी शुरू हो सकती है और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

उपभोक्ताओं में दहशत, घर का बजट प्रभावित

अचानक पैदा हुए इस गैस संकट ने पंजाब के मध्यमवर्गीय परिवारों के माथे पर बल ला दिए हैं। लोगों को डर है कि कहीं आने वाले समय में गैस के दाम न बढ़ जाएं या फिर उन्हें चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर न होना पड़े। होटलों और ढाबा संचालकों में भी इस कमी को लेकर काफी रोष है। विशेषज्ञों का मानना है कि बॉटलिंग प्लांट स्तर पर तकनीकी खामी या फिर ट्रांसपोर्टेशन की समस्या इस संकट की मुख्य वजह हो सकती है। फिलहाल, जनता की निगाहें प्रशासन और पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर टिकी हैं कि कब इस किल्लत से निजात मिलेगी।