Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आजकल फिटनेस का मतलब सिर्फ पतली कमर या गठीला शरीर ही नहीं है; स्वस्थ और ऊर्जावान रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। इसी चाहत के चलते जिम जाने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है और इसके साथ ही प्रोटीन पाउडर, शेक और सप्लीमेंट्स का चलन भी बढ़ा है। कई लोग सप्लीमेंट्स पर हर महीने हजारों रुपये खर्च करते हैं, यह मानते हुए कि इनके बिना मांसपेशियां नहीं बन सकतीं। लेकिन सवाल यह है कि क्या अच्छे शरीर और ताकत के लिए महंगे प्रोटीन पाउडर वाकई जरूरी हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपका आहार स्वस्थ और संतुलित है, तो सिर्फ भारतीय भोजन ही शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, ऊर्जा और ताकत प्रदान कर सकता है।
बाजार में मिलने वाले कई प्रोटीन पाउडर तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका अत्यधिक सेवन लीवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा, ये काफी महंगे भी होते हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या कोई सस्ता, सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प मौजूद है? तो आइए जानते हैं कि आपकी थाली कितनी पौष्टिक है। क्या आपके भारतीय भोजन में प्रोटीन शामिल है?
आपकी प्लेट कितनी शक्तिशाली है?
क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी रोज़मर्रा की थाली में मौजूद भोजन ही आपकी असली ताकत है? आजकल लोग फिट रहने के लिए महंगे प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, जबकि असली स्वास्थ्य और ताकत हमारे पारंपरिक भोजन में ही निहित है। दालें, चना, राजमा, सब्जियां, अनाज और डेयरी उत्पाद शरीर को आवश्यक प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं। ये पोषक तत्व मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और दिन भर ऊर्जा बनाए रखते हैं।
अगर आपकी थाली में दाल और चावल, रोटी और सब्जियां, दही या पनीर शामिल हैं, तो आपका आहार संतुलित है। दालें, खासकर चना और राजमा, प्राकृतिक प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए, अगली बार जब आप खाना खाएं, तो सिर्फ स्वाद पर ही नहीं, बल्कि पोषण पर भी ध्यान दें।
प्रोटीन की कमी से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?
शरीर को पर्याप्त प्रोटीन न मिलने पर कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे नाखूनों का आसानी से टूटना, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, बार-बार बीमार पड़ना, मनोदशा में बदलाव और सोचने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियों का कमजोर होना, और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना।
इन खाद्य पदार्थों से अपनी प्रोटीन की कमी को पूरा करें।
यदि आप सप्लीमेंट नहीं लेना चाहते हैं, तो अपने आहार में प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें: दालें, फलियां और मटर; दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद; अंडे; मछली और कम वसा वाला मांस; बीज और मेवे, और टोफू और टेम्पेह जैसे सोया उत्पाद।




