Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब और राजस्थान के बीच दशकों पुराने पानी के बंटवारे का विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाते हुए एलान किया है कि पंजाब सरकार अब राजस्थान से पानी का बकाया पैसा वसूलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि साल 1960 के बाद से राजस्थान को जो पानी दिया जा रहा है, उसका कोई भुगतान पंजाब को नहीं मिला है। इस कदम से उत्तर भारत की राजनीति में हलचल मच गई है, क्योंकि यह मामला न केवल वित्तीय है बल्कि दो राज्यों के बीच अंतर्राज्यीय जल संधियों से भी जुड़ा हुआ है।
दशकों पुराना हिसाब और पंजाब की मांग
मुख्यमंत्री भगवंत मान का तर्क है कि पंजाब के पास अब अतिरिक्त पानी की एक बूंद भी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1960 के दशक से राजस्थान को पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन इसके बदले में पंजाब को जो आर्थिक मुआवजा या रॉयल्टी मिलनी चाहिए थी, वह पिछले छह दशकों से लंबित है। पंजाब सरकार अब विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों की एक टीम तैयार कर रही है जो 1960 से लेकर अब तक की कुल बकाया राशि का आकलन करेगी। सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि पंजाब के हक का पैसा और पानी अब और नहीं छोड़ा जाएगा।
राजस्थान सरकार के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें?
पंजाब के इस आक्रामक रुख ने राजस्थान सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजस्थान के एक बड़े हिस्से की सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति पंजाब से आने वाली नहरों पर निर्भर है। यदि पंजाब इस मुद्दे को कानूनी जामा पहनाता है या पानी की आपूर्ति को लेकर कड़े नियम लागू करता है, तो राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, राजस्थान के नेताओं का तर्क है कि पानी का बंटवारा अंतर्राज्यीय समझौतों और ट्रिब्यूनल के आधार पर होता है, जिसे एकतरफा नहीं बदला जा सकता। अब देखना यह होगा कि राजस्थान सरकार पंजाब की इस 'बिलिंग' योजना का क्या जवाब देती है।
सियासी गलियारों में चर्चा और जल संकट की आहट
पंजाब में गिरते भूजल स्तर और नहरों की खस्ता हालत को देखते हुए भगवंत मान सरकार इसे राज्य के संसाधनों की रक्षा के तौर पर पेश कर रही है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार का साथ देने के संकेत दिए हैं, जिससे पंजाब की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की चौखट तक पहुंच सकता है। पंजाब का कहना है कि जब राज्य खुद पानी की कमी से जूझ रहा है, तो वह मुफ्त में दूसरे राज्यों को संसाधन कैसे उपलब्ध करा सकता है। यह मुद्दा अब केवल पानी का नहीं, बल्कि पंजाब के आत्मसम्मान और खजाने से जुड़ गया है।
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