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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों के इस अनुष्ठान में भक्त उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के लिए व्रत रखना एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी भरा फैसला होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान उपवास रखने से मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। यदि आप इस अवस्था में भी भक्ति भाव से व्रत रखना चाहती हैं, तो आपको सामान्य व्रतियों की तुलना में कुछ विशेष सावधानियां और खान-पान के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

निर्जला व्रत से बचें: हाइड्रेशन है सबसे जरूरी

गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है। व्रत के उत्साह में अक्सर महिलाएं पानी पीना कम कर देती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाओं को कभी भी 'निर्जला' उपवास नहीं रखना चाहिए। दिन भर में पर्याप्त पानी के साथ-साथ नारियल पानी, ताजे फलों का जूस और छाछ का सेवन करते रहना चाहिए। इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है और चक्कर आने या कमजोरी जैसी समस्याएं नहीं होतीं।

थोड़े-थोड़े अंतराल पर फलाहार का सेवन

लंबे समय तक खाली पेट रहना एसिडिटी और जी मिचलाने का कारण बन सकता है, जो गर्भावस्था में काफी कष्टदायक होता है। व्रत के दौरान एक बार में भारी भोजन करने के बजाय हर दो-तीन घंटे में कुछ न कुछ पौष्टिक फलाहार लेते रहें। आप मखाने, भुनी हुई मूंगफली, सेब, केला या पपीता जैसे फल ले सकती हैं। ध्यान रखें कि व्रत के दौरान भी आपके शरीर को पर्याप्त कैलोरी मिलनी चाहिए ताकि शिशु के विकास में कोई बाधा न आए।

कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का सही इस्तेमाल

नवरात्रि के व्रत में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की पूरियां या पकोड़े खूब पसंद किए जाते हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं को ज्यादा तला-भुना खाने से बचना चाहिए। कुट्टू की तासीर गर्म होती है, जो पाचन में समस्या पैदा कर सकती है। इसकी जगह आप सिंघाड़े के आटे का हलवा, बिना तेल की रोटी या साबूदाने की खिचड़ी का विकल्प चुन सकती हैं। सेंधा नमक का सीमित प्रयोग करें ताकि ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहे। साथ ही, प्रोटीन की पूर्ति के लिए पनीर और दही को अपने आहार का हिस्सा जरूर बनाएं।

शरीर के संकेतों को न करें नजरअंदाज

भक्ति अपनी जगह है, लेकिन सेहत प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि व्रत के दौरान आपको अधिक थकान, सिरदर्द, धुंधला दिखना या शिशु की हलचल में कोई कमी महसूस हो, तो तुरंत व्रत तोड़कर डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था में अचानक शुगर लेवल गिरना या बढ़ना दोनों ही खतरनाक हो सकते हैं। उपवास शुरू करने से पहले एक बार अपने गायनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से परामर्श जरूर लें और उनकी सलाह के अनुसार ही डाइट चार्ट तैयार करें।