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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की सियासत में इस वक्त राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का एकछत्र राज नजर आ रहा है। आंकड़ों के खेल में सत्ता पक्ष ने विपक्ष को कोसों पीछे छोड़ दिया है। चाहे विधानसभा हो, लोकसभा हो या फिर राज्यसभा, हर सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। सियासी गलियारों में इन आंकड़ों की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से 202 विधायक अब एनडीए के पाले में हैं। यह न केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के रणनीतिक कौशल को दर्शाता है, बल्कि 2027 के आगामी चुनावों के लिए एक बड़ी बिसात बिछाने की ओर इशारा कर रहा है।

लोकसभा से राज्यसभा तक एनडीए का दबदबा

बिहार की राजनीतिक शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से 30 सांसद एनडीए के हैं। इतना ही नहीं, राज्यसभा की 16 सीटों में से भी 12 पर एनडीए का कब्जा है। आंकड़ों का यह संगम बताता है कि बिहार में जमीनी स्तर पर गठबंधन की पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है। विपक्षी खेमा फिलहाल इन भारी-भरकम आंकड़ों के सामने अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जेडीयू, बीजेपी और सहयोगियों के बीच का यह तालमेल फिलहाल राज्य की राजनीति की दिशा तय कर रहा है।

विरोधियों के किले ढहाने की तैयारी

इतने बड़े बहुमत के बावजूद एनडीए के नेता शांत बैठने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो अब गठबंधन का अगला लक्ष्य उन चुनिंदा सीटों पर कब्जा करना है, जहां अभी भी विपक्ष का थोड़ा बहुत प्रभाव बचा है। एनडीए की नजर अब बिहार के उन सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों पर है, जहां महागठबंधन को परंपरागत वोट मिलते रहे हैं। चुनावी रणनीतिकारों ने अब उन 41 विधानसभा सीटों के लिए विशेष प्लान तैयार किया है जो एनडीए के पास नहीं हैं। "मिशन 2027" के तहत बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है ताकि आने वाले समय में विपक्ष को पूरी तरह हाशिए पर धकेला जा सके।

क्या होगा अगला बड़ा सियासी दांव?

राजनीतिक हलकों में सवाल तैर रहा है कि इस प्रचंड बहुमत के बाद अगला कदम क्या होगा? चर्चा है कि एनडीए अब राज्य में बड़े प्रशासनिक सुधारों और नई विकास योजनाओं के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ और गहरी करेगा। वहीं, विपक्ष की ओर से तेजस्वी यादव की रैलियों और जनसंपर्क अभियानों को काउंटर करने के लिए एनडीए के दिग्गज नेता भी जल्द ही जिलों का दौरा शुरू करने वाले हैं। दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है और लक्ष्य साफ है—बिहार को पूरी तरह 'विपक्ष मुक्त' करने की दिशा में आगे बढ़ना।