Prabhat Vaibhav,Digital Desk : प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अहम पहल की है। राज्य के सात जिलों — दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, गया, सिवान, गोपालगंज और मोतिहारी — में नए आयुष अस्पताल खोलने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इन जिलों में जल्द ही 50 बेड की क्षमता वाले आयुष अस्पताल बनाए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है और अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। इन अस्पतालों के शुरू होने से लोगों को पारंपरिक इलाज के बेहतर और सुलभ विकल्प मिल सकेंगे।
प्रत्येक अस्पताल पर आएगा लगभग 15 करोड़ रुपये का खर्च
विभागीय जानकारी के अनुसार, हर आयुष अस्पताल के निर्माण पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन अस्पतालों में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों से इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को कम खर्च में प्रभावी इलाज मुहैया कराना है।
आधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस
प्रस्तावित आयुष अस्पतालों में मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ओपीडी और आईपीडी सेवाएं, औषधालय, पंचकर्म यूनिट, योग व ध्यान केंद्र, जांच कक्ष और जरूरी चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि इलाज की गुणवत्ता बनी रहे।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन आयुष अस्पतालों के शुरू होने से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी। खासकर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, पुराने रोगों और मानसिक तनाव के इलाज में आयुष पद्धतियां काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं। इससे सरकारी एलोपैथिक अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।
जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
अधिकारियों के अनुसार, अस्पतालों के लिए जमीन चिह्नित करने और अन्य जरूरी औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। सभी सात जिलों में चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर इन आयुष अस्पतालों को आम लोगों के लिए खोल दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग पारंपरिक चिकित्सा का लाभ उठा सकें।




