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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : दुनिया अभी कोरोना के जख्मों से पूरी तरह उबरी भी नहीं थी कि एक बार फिर 'कोविड-19' के नाम ने दहशत पैदा कर दी है। अमेरिका में कोरोना के मामलों में आए अचानक उछाल ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों ने वायरस के एक नए और बेहद चालाक वेरिएंट BA.3.2 की पहचान की है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को चकमा देने में माहिर बताया जा रहा है। अमेरिका के साथ-साथ अब तक 23 देशों में इस वेरिएंट ने अपनी दस्तक दे दी है, जिससे भारत में भी खतरे की घंटी बजने लगी है।

बेहद खतरनाक है नया BA.3.2 वेरिएंट: इम्युनिटी पर कर रहा सीधा वार

सीडीसी (CDC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नया BA.3.2 वेरिएंट पिछले सभी रूपों से अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वेरिएंट में 'इम्यून इवेजन' (Immune Evasion) की क्षमता है, जिसका मतलब है कि यह उन लोगों को भी दोबारा संक्रमित कर सकता है जिन्हें पहले कोरोना हो चुका है या जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर हुए टीकाकरण और पिछले संक्रमणों के कारण लोगों में 'हाइब्रिड इम्युनिटी' विकसित हो गई है। डॉक्टरों का मानना है कि मामले बढ़ सकते हैं, लेकिन स्थिति 2021 जैसी भयावह होने की आशंका कम है।

भारत के लिए कितना बड़ा जोखिम? एक्सपर्ट्स की राय

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में फिर से लॉकडाउन या वैसी ही पाबंदियां लौटेंगी? मशहूर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एस.एम. फयाज़ के अनुसार, कोरोना अब एक 'एंडेमिक' (Endemic) यानी स्थानिक बीमारी बन चुका है। इसका मतलब है कि यह वायरस पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि समय-समय पर नए रूप बदलकर लौटता रहेगा। भारत के संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना अनिवार्य है। संक्रमण के लक्षण हल्के से मध्यम हो सकते हैं, जिनमें बुखार, खांसी और थकान शामिल है, जिनका इलाज घर पर ही संभव है।

बुजुर्गों और बीमारों को विशेष सावधानी की जरूरत

भले ही स्वस्थ लोगों के लिए यह वेरिएंट ज्यादा घातक न हो, लेकिन कुछ वर्गों के लिए खतरा अब भी बरकरार है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और पहले से गंभीर बीमारियों (जैसे शुगर, हार्ट पेशेंट) से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक तैयार है, लेकिन किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए निगरानी (Surveillance) और टेस्टिंग को बढ़ाना जरूरी है। फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है।