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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य मदद की अपील को ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। स्टारमर के इस कड़े फैसले ने वाशिंगटन और लंदन के बीच दशकों पुराने 'विशेष संबंधों' (Special Relationship) में दरार के संकेत दे दिए हैं।

'नेशनल इंटरेस्ट' सर्वोपरि: क्यों पीछे हटा ब्रिटेन?

प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा, "यह हमारा युद्ध नहीं है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन की प्राथमिकता अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाना है। स्टारमर भली-भांति जानते हैं कि अगर ब्रिटेन इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पूरी तरह बंद होने से ब्रिटेन में तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और महंगाई अनियंत्रित हो जाएगी।

शर्तों के साथ सैन्य अड्डे का इस्तेमाल: रक्षात्मक नीति पर अडिग

कीर स्टारमर ने कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन पूरी तरह झुकने से इनकार कर दिया। ब्रिटेन ने साइप्रस स्थित अपने RAF अक्रोटिरी (Akrotiri) सैन्य अड्डे के उपयोग की अनुमति अमेरिका को दी है, लेकिन इसके साथ 'कड़ी शर्तें' भी जोड़ी हैं:

केवल रक्षात्मक उपयोग: इस अड्डे का इस्तेमाल केवल आने वाली मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराने के लिए किया जा सकता है।

आक्रामक हमले पर रोक: अमेरिका इस बेस का उपयोग ईरान की धरती पर सीधे हमले के लिए नहीं कर पाएगा।

हाल ही में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) ने खाड़ी क्षेत्र में कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया था, जिसे ब्रिटेन ने एक 'रक्षात्मक कार्रवाई' बताया है।

डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी: 'विशेष संबंधों' में आई दरार?

ब्रिटेन के इस रुख पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने इसे 'सहयोगियों का विश्वासघात' करार देते हुए कहा कि सैन्य ठिकानों के निर्बाध उपयोग की अनुमति न देना दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक रिश्तों को कमजोर करता है। नाटो (NATO) के अन्य सहयोगी देश भी ब्रिटेन पर युद्ध में शामिल होने का भारी दबाव बना रहे हैं, लेकिन स्टारमर अपने फैसले पर अडिग हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कूटनीतिक पहल

सैन्य भागीदारी से इनकार करने के बावजूद, ब्रिटेन ने 'प्लान 35' के तहत कूटनीतिक रास्ता खुला रखा है। स्टारमर ने घोषणा की है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित बनाने और तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करेंगे। ब्रिटेन का मानना है कि युद्ध के बजाय कूटनीति के जरिए ही इस वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान निकाला जा सकता है।