Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पूर्वांचल के हजारों यात्रियों के लिए 'लाइफलाइन' मानी जाने वाली गाजीपुर-वाराणसी नॉनस्टॉप बस सेवा विभागीय अनदेखी की भेंट चढ़ गई है। मात्र दो महीने के सफल संचालन के बाद बंद हुई यह सेवा एक साल बीत जाने के बाद भी बहाल नहीं हो सकी है। कुंभ मेले का बहाना बनाकर रोकी गई यह बस सेवा अब माघ मेला 2026 बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हुई, जिससे नौकरीपेशा, छात्रों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों खास थी यह 'नॉनस्टॉप' सेवा?
दिसंबर 2024 में शुरू हुई इस बस सेवा ने गाजीपुर और वाराणसी के बीच के सफर को बेहद सुगम बना दिया था। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं थीं:
बिना परिचालक की बस: टिकट बस स्टैंड पर ही मिल जाता था, जिससे कंडक्टर की जरूरत नहीं पड़ती थी।
सीधी यात्रा: बीच रास्ते में कहीं भी सवारी नहीं ली जाती थी, जिससे समय की बचत होती थी।
तय समय: सुबह 6 से शाम 6 बजे तक चलने वाली यह बस महज डेढ़ घंटे में वाराणसी पहुंचा देती थी।
कुंभ गया, माघ मेला भी बीता... पर बस नहीं लौटी
13 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इन बसों को प्रयागराज रूट पर लगा दिया गया था। तब यात्रियों को भरोसा दिया गया था कि मेला खत्म होते ही सेवा बहाल होगी।
एक साल का इंतजार: कुंभ खत्म हुए एक साल से ज्यादा हो गया।
माघ मेला 2026 भी खत्म: हाल ही में संपन्न हुआ 2026 का माघ मेला भी बीत चुका है, लेकिन गाजीपुर डिपो ने इस प्रीमियम सेवा को दोबारा शुरू करने की जहमत नहीं उठाई।
यात्रियों का दर्द: डेढ़ घंटे का सफर अब ढाई घंटे में
बस सेवा बंद होने का सीधा असर आम जनता की जेब और समय पर पड़ा है:
समय की बर्बादी: नॉनस्टॉप बस से जो सफर 1.5 घंटे में कटता था, अब साधारण बसों में 2.5 से 3 घंटे लग रहे हैं।
इलाज और पढ़ाई प्रभावित: बीएचयू (वाराणसी) जाने वाले मरीजों और कोचिंग करने वाले छात्रों का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।
भीड़ की मार: साधारण बसों में पैर रखने की जगह नहीं होती, जबकि नॉनस्टॉप सेवा आरामदायक और सुरक्षित थी।
अधिकारी का पक्ष: "मुझे जानकारी नहीं थी"
जब इस गंभीर समस्या को लेकर प्रभारी एआरएम अभिषेक सिंह से बात की गई, तो उन्होंने हैरानी जताई। उन्होंने कहा:
"इस सेवा के बंद होने की जानकारी मुझे नहीं थी। इसके लिए मंडल कार्यालय को पत्र लिखा जाएगा। यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि है और जल्द ही इस सेवा को दोबारा प्रारंभ कराया जाएगा।"
यात्रियों की मांग: "साहब! बस चला दो"
जयप्रकाश कसोधन (यात्री): "डेढ़ घंटे की जगह अब ढाई घंटे लगते हैं, पूरा दिन खराब हो जाता है।"
अनूप मद्धेशिया (मरीज): "अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है, सीधी बस दोबारा चलनी चाहिए।"
अक्षत चौधरी (छात्र): “कोचिंग की क्लास मिस हो जाती है, नॉनस्टॉप सेवा ही एकमात्र सहारा थी।”




