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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर एक नया और सनसनीखेज दावा किया है। जहाँ एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने F-15 पायलट को सुरक्षित बचाने के लिए 155 विमानों के ऐतिहासिक मिशन की सफलता का जश्न मनाया, वहीं ईरान ने इसे 'यूरेनियम चोरी' की नाकाम कोशिश करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि पायलट को बचाना महज एक दिखावा था, असली मकसद ईरान के परमाणु खजाने तक पहुँचना था।

ईरान का दावा: रेस्क्यू नहीं, यूरेनियम लूटने का था इरादा

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इस पूरे अभियान पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "कोहगिलुयेह और बोयेर-अहमद प्रांत का वह इलाका, जहाँ अमेरिकी पायलट के गिरे होने का दावा किया गया है, उस जगह से बहुत दूर है जहाँ अमेरिका ने अपनी सेना उतारने की कोशिश की।" ईरान का सीधा आरोप है कि अमेरिकी और इजरायली सेनाएं इस्फ़हान स्थित परमाणु केंद्र से संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) चुराने के इरादे से दाखिल हुई थीं।

इस्फ़हान: क्यों इस शहर पर टिकी हैं अमेरिका की निगाहें?

इस्फ़हान शहर ईरान का सबसे बड़ा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Isfahan Nuclear Technology Center) है। यह रणनीतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण क्यों है, इसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

परमाणु ईंधन: यहाँ यूरेनियम का रूपांतरण और ईंधन उत्पादन किया जाता है।

विवाद की जड़: ईरान इसे नागरिक कार्यक्रम बताता है, जबकि अमेरिका और इजरायल इसे परमाणु बम बनाने की फैक्ट्री मानते हैं।

रक्षा कवच: यहाँ ईरान के सबसे घातक F-14 टॉमकैट लड़ाकू विमानों का मुख्य बेस भी है।

दो अमेरिकी C-130जे कमांडो विमान हुए तबाह: हादसा या हमला?

इस हाई-रिस्क मिशन के दौरान अमेरिका को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी सरकार और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार:

तकनीकी खराबी: इस्फ़हान में लैंडिंग के बाद दो C-130जे कमांडो विमानों में खराबी आ गई और वे दोबारा उड़ान नहीं भर सके।

थर्मिट चार्ज से विस्फोट: अमेरिकी कमांडरों ने दुश्मन के हाथ अपनी गुप्त तकनीक न लगने देने के लिए दोनों विमानों को मौके पर ही थर्मिट चार्ज (Thermite Charges) से उड़ाने का आदेश दिया।

भारी बमबारी: अमेरिका को अपने ही गिरे हुए विमानों के मलबे पर बमबारी करनी पड़ी ताकि वहाँ मौजूद कोई भी संवेदनशील उपकरण आईआरजीसी (IRGC) के हाथ न लग सके।

ईरान का पलटवार: "अमेरिका के लिए आपदा था यह मिशन"

ईरानी सेना ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए इसे एक "विफल ऑपरेशन" बताया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी विमानों को तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि ईरानी हमले के बाद आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी। ईरान ने इसे अमेरिका की एक बड़ी सामरिक हार बताया है।

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस इस मिशन को एक "वीरतापूर्ण बचाव अभियान" बता रहा है। इन परस्पर विरोधी दावों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए सिरे से खलबली मचा दी है। क्या यह वास्तव में एक पायलट की जान बचाने की जंग थी या परमाणु शक्ति के संतुलन को बदलने की एक गुप्त कोशिश, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।