Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में एक बार फिर लैंड-फॉर-जॉब घोटाला (भूमि के बदले नौकरी) सुर्खियों में है। दिल्ली की सीबीआई अदालत ने इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के कई सदस्यों सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का कदम लिया है। निर्णायक सुनवाई से पहले ही इस मामले को लेकर राजनीतिक गरमाहट तेज़ हो गई है।
क्या है लैंड-फॉर-जॉब केस?
घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसियों ने शुरू की थी जिसमें रेलवे में नौकरी देने के बदले पट्टे या जमीन हस्तांतरित करने के आरोप हैं। आरोप है कि
कुछ लोगों को रेलवे में ग्रुप-D नौकरियां बिना उचित प्रक्रिया के दी गईं,
इसके बदले में उन लोगों या उनके परिजनों ने अपनी जमीन लालू परिवार को सस्ते दाम पर बेच दीं।
इस जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों में आंका गया है, लेकिन कथित रूप से इसे काफी कम मूल्य पर हस्तांतरित किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
जनता दल (यू) ने लालू परिवार की निंदा करते हुए कहा है कि यह मामला केवल घोटाला नहीं, बल्कि “क्रिमिनल पॉलिटिकल सिंडिकेट” (आपराधिक राजनीतिक साजिश) का उदाहरण है।
पार्टी के नेताओं ने पूछा है कि क्या जमीनों के बारे में पारदर्शिता है, खासकर जब उन पर नौकरी का सौदा किया गया था।
वहीं, बीजेपी और NDA श collective आरोपों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं और लालू-राबड़ी को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराने की मांग कर रहे हैं।
अब क्या आगे?
लालू और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय होने के बाद मामला अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है। राजनीतिक वजन के कारण इसे बिहार की आगामी चुनावी राजनीति में भी महत्त्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है। आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि आरोप साबित होते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल यह मामला राजनीति और न्याय दोनों स्तरों पर ध्यान का केंद्र बना हुआ है।




