Prabhat Vaibhav,Digital Desk : प्राचीन ज्ञान की धरती नालंदा एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी चमक बिखेर रही है। मंगलवार को राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के भव्य दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिरकत की। इस गौरवशाली अवसर पर राष्ट्रपति ने देश-विदेश के मेधावी छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से गोल्ड मेडल प्रदान किए। मेडल पाकर छात्रों के चेहरे गर्व से खिल उठे और ऐतिहासिक परिसर 'नालंदा-नालंदा' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
वियतनाम से भूटान तक: सात समंदर पार नालंदा की शिक्षा का डंका
समारोह में केवल भारत ही नहीं, बल्कि वियतनाम, भूटान और अन्य देशों के छात्रों ने भी अपनी सफलता का परचम लहराया। वियतनाम की छात्रा न्गुएन ह्युइन जुआन त्रिन्ह ने भावुक होते हुए कहा कि नालंदा का अंतरराष्ट्रीय परिवेश और यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता उनके जीवन का सबसे समृद्ध अनुभव रहा है। वहीं, भूटान के लुंगतेन जाम्त्शो, जो अब अपने देश में शिक्षक हैं, ने बताया कि नालंदा की ऐतिहासिक शिक्षा पद्धति आज उनके पेशेवर जीवन की मजबूत नींव बनी हुई है।
'बुद्धिस्ट स्टडीज' से 'इकोलॉजी' तक: शोध और करियर में नालंदा का नेतृत्व
दीक्षांत समारोह में डिग्री पाने वाले छात्रों की सफलता की कहानियां प्रेरणादायक हैं। वियतनाम की फाम थी थू अब दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं, जिसका श्रेय वह नालंदा के उत्कृष्ट मार्गदर्शन को देती हैं। वहीं, रांची के अंकित पांडेय, जो वर्तमान में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं, ने अपना लक्ष्य देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना बताया। उत्तराखंड की मेघना विष्ट ने भी विश्वविद्यालय की शिक्षण पद्धति को अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट करार दिया।
बिहार की बेटी अक्षया ने बढ़ाया मान: राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान
स्थानीय प्रतिभाओं ने भी इस समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बिहारशरीफ की अक्षया आकृति को राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल मिला। यूजीसी नेट (UGC NET) क्वालीफाई कर चुकी अक्षया ने नालंदा की फैकल्टी और सहयोगी माहौल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होना उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक क्षण है और अब उनका लक्ष्य सिविल सेवा के माध्यम से देश की सेवा करना है।
वैश्विक पहचान और भविष्य की नींव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में नालंदा के पुनरुद्धार को भारत की सांस्कृतिक विजय बताया। छात्रों के साझा किए गए अनुभवों से स्पष्ट है कि नालंदा विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और उच्च स्तरीय शोध का केंद्र बन चुका है। गोल्ड मेडल पाकर चमके इन चेहरों ने सिद्ध कर दिया है कि नालंदा आज भी भविष्य के वैश्विक नेतृत्व का निर्माण कर रहा है।




