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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में इस वर्ष भी रामनवमी के अवसर पर आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 27 मार्च 2026 को रामनवमी के पावन पर्व पर प्रभु श्रीराम का 'सूर्य तिलक' किया जाएगा। इस आयोजन को निर्बाध और सटीक रूप से संपन्न करने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की के विशेषज्ञों की टीम आज, 25 मार्च को अयोध्या पहुंच सकती है, जो इस अत्याधुनिक सिस्टम का गहन परीक्षण (Trial) करेगी।

क्या है 'सूर्य तिलक' और कैसे काम करती है यह तकनीक?

सूर्य तिलक की यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम (दर्पण और लेंस का संयोजन) पर आधारित है। इसे भारत के शीर्ष संस्थानों—सीबीआरआई रुड़की, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) बेंगलुरु और इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है।

पाइप और लेंस का जाल: मंदिर के शिखर से पीतल के पाइपों और विशेष लेंस के माध्यम से सूर्य की किरणों को परावर्तित (Reflect) किया जाता है।

सटीक निशाना: दर्पणों की मदद से किरणों को मोड़कर सीधे गर्भगृह में विराजमान रामलला के मस्तक (ललाट) पर पहुँचाया जाता है।

75 मिलीमीटर का तिलक: यह सूर्य की किरणें 75 मिलीमीटर के गोलाकार स्वरूप में रामलला का अभिषेक करती हैं।

समय: जन्मोत्सव के दौरान मध्याह्न 12:00 बजे से लगभग 4-5 मिनट तक प्रभु का मस्तक सूर्य की रोशनी से प्रकाशित रहेगा।

अगले 10 वर्षों के लिए CBRI के साथ अनुबंध

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के अनुरूप इस परंपरा को हर साल निभाने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट ने अगले 10 वर्षों तक हर रामनवमी पर सूर्य तिलक संपन्न कराने के लिए सीबीआरआई (CBRI) के साथ आधिकारिक अनुबंध (Contract) किया है।

ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के अनुसार, सीबीआरआई की टीम रामनवमी से पहले ही अयोध्या पहुंचकर यह सुनिश्चित करेगी कि दर्पणों और लेंस का कोण (Angle) सूर्य की स्थिति के अनुसार बिल्कुल सटीक हो।

आस्था और तकनीक का अनोखा संगम

22 जनवरी 2024 को हुई प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही राम मंदिर में तकनीक का उपयोग श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है। बेंगलुरु की 'आप्टिका' संस्था द्वारा विकसित रिफ्लेक्टर तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि बिना किसी बिजली या कृत्रिम प्रकाश के, केवल प्राकृतिक सूर्य की किरणों से ही भगवान का अभिषेक हो।

27 मार्च को होने वाले इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए अयोध्या में लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन के कड़े इंतजाम किए हैं।