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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हरिद्वार में संत समाज ने हाल ही में प्रस्तावित UGC कानून पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि यह व्यवस्था समाज में विभाजन और शिक्षा के संवेदनशील क्षेत्र में असंतुलन उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है।

संतों का दृष्टिकोण—समानता और सामाजिक एकता जरूरी
महामंडलेश्वर स्वामी वेदमूर्ति पुरी महाराज ने कहा कि UGC से जुड़े प्रावधान समाज को बांटने वाले प्रतीत होते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसा कोई भी निर्णय न लिया जाए जिससे सामाजिक एकता प्रभावित हो। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

शैक्षणिक निर्णय नहीं, राष्ट्र और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला
महामंडलेश्वर स्वामी आदियोगी पुरी महाराज ने कहा कि भारत की आत्मा समानता में निहित है। संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समानता का अधिकार है। यदि कोई नीति जाति, वर्ग या पहचान के आधार पर विभाजन की आशंका उत्पन्न करती है, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक है।

स्वामी आदियोगी पुरी ने आगे कहा कि UGC से जुड़े निर्णय केवल शैक्षणिक विषय नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्र के भविष्य और युवाओं की मानसिक दिशा से भी जुड़े हैं।

शिक्षा क्षेत्र में विश्वास और निष्पक्षता जरूरी
महामंडलेश्वर स्वामी गर्व गिरी महाराज ने कहा कि किसी भी शिक्षा व्यवस्था में भय का वातावरण नहीं होना चाहिए। शिक्षा का क्षेत्र विश्वास, संवाद और निष्पक्षता पर आधारित होना चाहिए।

संतों ने सरकार से दोहराई मांग
स्वामी नागेंद्र महाराज और अन्य संतों ने भी सरकार से अनुरोध किया कि UGC अधिसूचना पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए, ताकि समाज में विभाजन की स्थिति न पैदा हो और शिक्षा का क्षेत्र निष्पक्ष और समान रहे।