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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : सनातन धर्म की रक्षा और गाय को 'पशु' की श्रेणी से हटाकर 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने के लिए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शिव की नगरी काशी से एक निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार, 6 मार्च को वाराणसी के केदार घाट स्थित श्री विद्या मठ से 'गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा' (Gau Pratishtha Dharmayudh Yatra) का भव्य शुभारंभ हुआ। हज़ारों संतों और भक्तों की उपस्थिति में शंकराचार्य ने संकल्प लिया कि जब तक भारत में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगता, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

'वोट' नहीं, अब 'नोट' और 'चोट' से होगा समाधान

शंकराचार्य ने जनसभा को संबोधित करते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दशकों से राजनीतिक दल गाय के नाम पर केवल वोट मांगते रहे हैं, लेकिन अब हिंदू समाज जाग चुका है। उन्होंने 'गो-भक्त' और 'गो-द्रोही' के बीच स्पष्ट लकीर खींचते हुए कहा कि आगामी चुनावों में केवल उन्हीं को समर्थन मिलेगा जो गो-माता को सम्मान दिलाने का लिखित आश्वासन देंगे। शंकराचार्य ने इसे केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक 'धर्मयुद्ध' करार दिया जो दिल्ली के सिंहासन तक गूंजेगा।

2026 का संकल्प: 31 मार्च तक दिल्ली पहुँचने का लक्ष्य

यह पदयात्रा काशी के गलियों से होते हुए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों, हरियाणा और राजस्थान से गुजरकर 31 मार्च 2026 को देश की राजधानी दिल्ली पहुँचेगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य संसद पर दबाव बनाना है ताकि संविधान में संशोधन कर गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कत्लखानों का चलना भारत की आत्मा पर एक कलंक है।

बागेश्वर बाबा और अन्य संतों का मिला 'महा-समर्थन'

इस धर्मयुद्ध को उस समय और मजबूती मिली जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी काशी पहुँचकर इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया। शास्त्री ने कहा कि वे इस यात्रा में शंकराचार्य के साथ हैं और हर सनातनी को इस यज्ञ में आहुति देनी चाहिए। इसके अलावा काशी के अन्य प्रमुख अखाड़ों और मठों के महंतों ने भी इस यात्रा को हरी झंडी दिखाई, जिससे यह एक विशाल जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

मुख्य मांगें और उद्देश्य:

राष्ट्रमाता का दर्जा: गाय को पशु की सूची से हटाकर संवैधानिक रूप से 'राष्ट्रमाता' घोषित करना।

गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध: पूरे देश में गो-मांस के व्यापार और कत्लखानों पर तत्काल रोक।

गो-मंत्रालय का गठन: गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्र में अलग मंत्रालय की मांग।

सख्त कानून: गो-तस्करी और हत्या करने वालों के लिए उम्रकैद जैसे कठोर दंड का प्रावधान।