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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की सियासत में 'मिशन 2027' की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के भीतर बड़े बदलावों को लेकर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में अब 8 महीने से भी कम का समय शेष है, फिर भी संगठन की नई टीम और योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। बैठकों का अंतहीन सिलसिला जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

पंकज चौधरी के 5 महीने: टीम इंडिया तो तैयार पर 'टीम यूपी' का इंतजार

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान संभाले 5 महीने बीत चुके हैं। केंद्र से लेकर प्रदेश स्तर तक दर्जनों बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन संगठन की प्रदेश टीम अब तक अधूरी है। 26 फरवरी को 11 जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद से संगठनात्मक नियुक्तियों पर 'ब्रेक' लगा हुआ है। कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि कुछ नामों पर खींचतान इतनी अधिक है कि पार्टी को बड़े फैसले टालने पड़ रहे हैं।

मंत्रिमंडल फेरबदल पर अटकी सुई: विनोद तावड़े के फीडबैक के बाद भी चुप्पी

हाल ही में राष्ट्रीय महामंत्री और चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े ने लखनऊ में दो दिवसीय मैराथन बैठकें कीं। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, दोनों उपमुख्यमंत्री (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक) और वरिष्ठ नेताओं से मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लिया। इसके बावजूद, मंत्रिमंडल में फेरबदल की गाड़ी एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। पुराने कार्यकर्ताओं की नजरें अब बोर्ड, आयोग और निगमों के पदों पर टिकी हैं, लेकिन वहां भी 'असमंजस का ब्रेकर' बाधा बना हुआ है।

संघ और भाजपा के बीच समन्वय: बैठकों का महाकुंभ

जनवरी से अप्रैल के बीच भाजपा और आरएसएस (RSS) के बीच समन्वय बिठाने के लिए कई दौर की चर्चाएं हुईं। पहली बार छह क्षेत्रों की समन्वय बैठकों में संघ के पदाधिकारियों के साथ खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। बनारस, गोरखपुर, पश्चिम, कानपुर-बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्रों में फीडबैक तो लिया गया, लेकिन निर्णयों के क्रियान्वयन में हो रही देरी पार्टी के भीतर ही सवालों को जन्म दे रही है।

अंतिम मोहर के लिए दिल्ली पर टिकी नजरें

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष से कई बार मुलाकात की है। 30 अप्रैल को 'महिला जनाक्रोश अभियान' के समापन के बाद माना जा रहा था कि नई टीम का ऐलान होगा। चुनावी वर्ष होने के कारण कार्यकर्ताओं में बेचैनी है कि अगर अब बदलाव नहीं हुए, तो चुनावी रण में नई टीम को जमने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। अब देखना यह है कि दिल्ली से हरी झंडी कब मिलती है और यूपी भाजपा का यह 'सस्पेंस' कब खत्म होता है।