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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार केवल प्रवेश द्वार ही नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का द्वार भी माना जाता है। इसे 'सिंधद्वार' भी कहते हैं। वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार की सही दिशा परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य, सुख और धन पर सीधा प्रभाव डालती है । तो आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार , घर के मुख्य द्वार की कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है।

मुख्य द्वार तक पहुंचने के सर्वोत्तम निर्देश

वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार के लिए निम्नलिखित तीन दिशाएँ सबसे शुभ मानी जाती हैं :

उत्तर दिशा : इस दिशा के स्वामी कुबेर हैं, जो धन और समृद्धि के देवता हैं। चूंकि मुख्य द्वार उत्तर दिशा में है , इसलिए घर में आर्थिक उन्नति होती है और करियर में नए अवसर प्राप्त होते हैं ।

पूर्व दिशा : सूर्य देव की यह दिशा ज्ञान, प्रसिद्धि और शक्ति का प्रतीक है । पूर्व दिशा में स्थित द्वार सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश लाता है, जिससे परिवार में मान-सम्मान बढ़ता है।

उत्तर- पूर्व कोना : उत्तर और पूर्व के बीच स्थित यह कोना अत्यंत पवित्र माना जाता है । चूंकि मुख्य द्वार यहीं स्थित है, इसलिए घर में मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुख का अनुभव होता है।

निर्देश और सावधानियां

पश्चिम दिशा: यदि द्वार पश्चिम दिशा में सही स्थिति में हो, तो यह अत्यंत शुभ सिद्ध हो सकता है। पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव हैं, जिन्हें समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है । यदि आप किसी व्यवसाय में हैं या आईटी क्षेत्र से जुड़े हैं , तो इस दिशा में स्थित द्वार आपको सफलता दिला सकता है ।

वास्तु शास्त्र में किसी भी दिशा को 9 भागों में विभाजित किया जाता है , जिन्हें 'पाद' कहा जाता है। पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार के नियम इस प्रकार हैं:

शुभ स्थिति : यदि आपका दरवाजा पश्चिम दिशा में ( उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम की ओर गिनते हुए ) तीसरे, चौथे , पांचवें या छठे स्थान पर है, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है ।

अशुभ स्थिति: दक्षिण -पश्चिम कोने के पास का दरवाजा नकारात्मक प्रभाव ला सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।

दक्षिण दिशा: ज्योतिष में इस दिशा को सावधानी से देखना चाहिए । यदि द्वार दक्षिण दिशा में होना अनिवार्य हो, तो वास्तु विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दक्षिण दिशा को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए, यदि घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में हो, तो नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, दक्षिण दिशा की तरह हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यदि द्वार पश्चिम दिशा में सही "पद" में हो, तो यह अत्यंत शुभ सिद्ध हो सकता है।

मुख्य द्वार के लिए विशेष नियम

दहलीज : घर के मुख्य द्वार पर दहलीज होना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है ।

सामग्री: मुख्य दरवाजा हमेशा मजबूत लकड़ी का बना होना चाहिए और अन्य दरवाजों की तुलना में आकार में बड़ा होना चाहिए।

शुभ संकेत : दरवाजे पर स्वास्तिक, ओम या गणेश जी की मूर्ति रखने से नकारात्मकता दूर होती है।

स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था: प्रवेश द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होनी चाहिए। इसे अंधेरा रखना अशुभ माना जाता है ।

द्वार खुलने की दिशा: वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए, जो स्वागत और धन संचय का प्रतीक है।