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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि प्रदेश में प्रशासन अब नियंत्रण आधारित नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि अनावश्यक नियम, प्रक्रियाएं और अनुमतियां हटाकर आम नागरिक और उद्यमियों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। उच्च स्तरीय समीक्षा में सीएम ने निर्देश दिए कि हर सुधार का असर केवल कागजों में नहीं, बल्कि वास्तविक जमीन पर नजर आए।

कंप्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन का फेज-2
मुख्यमंत्री ने कहा कि फेज-1 में प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया, लेकिन असली चुनौती फेज-2 में इन सुधारों को स्थायी और संस्थागत रूप देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डी-रेगुलेशन का अर्थ नियंत्रण खत्म करना नहीं है, बल्कि जरूरी नियमों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। बैठक में नौ थीम, 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्र और वैकल्पिक प्राथमिकता वाले क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं।

भूमि और भवन निर्माण में आसान प्रक्रियाएं
भूमि उपयोग से जुड़े मामलों में लैंड यूज में बदलाव जैसी जटिल अनुमतियों को समाप्त या सरल करने पर काम किया जा रहा है, जिससे किसानों और भू-स्वामियों को राहत मिले। भवन निर्माण और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में नक्शा पास, लेआउट अप्रूवल और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं को रिस्क-बेस्ड सिस्टम, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल पर लाने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल प्लेटफार्म और समयबद्ध अनुमतियां
सीएम ने कहा कि विभिन्न विभागों की अनुमतियों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म पर लाकर स्पष्ट समय सीमा तय करनी होगी, ताकि उद्योगों और नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। ऊर्जा, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में ऑनलाइन और आटो-अप्रूवल सिस्टम को प्राथमिकता दी जाएगी।

सर्वसुलभ सुधारों का लक्ष्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये सुधार केवल निवेश और उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर बनाने, बिजली-पानी कनेक्शन और रोजमर्रा की सेवाओं से जुड़ी आम जनता की परेशानियों को कम करने के लिए भी हैं। सभी विभाग तय समय सीमा में सुधार लागू करें और नियमित निगरानी से जवाबदेही सुनिश्चित करें।

ऊर्जा और पर्यावरण सेक्टर में बदलाव
ऊर्जा क्षेत्र में बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य तकनीकी अनुमतियों की प्रक्रिया सरल बनाई जा रही है। पर्यावरण अनुमतियों में कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए अनावश्यक क्लीयरेंस हटाकर ट्रस्ट-बेस्ड सिस्टम अपनाया जाएगा। उच्च जोखिम वाले मामलों में पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाए रखते हुए समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।