Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आयुर्वेद में 'जड़ी-बूटियों का राजा' माना जाने वाला अश्वगंधा इन दिनों चर्चा में है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और आयुष मंत्रालय ने इसके इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। सोशल मीडिया पर चल रही 'पूर्ण प्रतिबंध' की खबरों के उलट, यह प्रतिबंध केवल पौधे के एक विशिष्ट हिस्से पर है।
क्या अश्वगंधा पूरी तरह बैन हो गया है?
नहीं। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। सरकार ने अश्वगंधा पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है।
किस पर प्रतिबंध है: अश्वगंधा के पत्तों (Leaves) और उनके अर्क (Extract) के इस्तेमाल पर।
क्या सुरक्षित है: अश्वगंधा की जड़ (Root) का इस्तेमाल पहले की तरह ही जारी रहेगा। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही जड़ के सीमित उपयोग को सुरक्षित मानते हैं।
आखिर पत्तों पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
FSSAI का यह फैसला वैज्ञानिक शोधों और सुरक्षा चिंताओं पर आधारित है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
लीवर के लिए खतरा: शोध में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में विथानोलाइड्स (Withanolides), खासकर विथाफेरिन-ए, बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। इनका अधिक सेवन लीवर को गंभीर नुकसान (Hepatotoxicity) पहुंचा सकता है।
पाचन और नसों पर असर: विशेषज्ञों के अनुसार, पत्तों के अर्क से पेट की समस्याएं और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है।
पारंपरिक उपयोग का अभाव: आयुर्वेद में सदियों से मुख्य रूप से अश्वगंधा की जड़ का ही औषधि के रूप में वर्णन मिलता है। पत्तों के सुरक्षा मानक अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
कंपनियों के लिए कड़े निर्देश
16 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के बाद, अब स्वास्थ्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को इन नियमों का पालन करना होगा:
स्पष्ट लेबलिंग: अब कंपनियों को पैकेट पर साफ तौर पर लिखना होगा कि उन्होंने पौधे के किस भाग (जड़ या पत्ता) का उपयोग किया है।
कानूनी कार्रवाई: यदि कोई कंपनी चोरी-छिपे पत्तों या उनके अर्क का उपयोग करती पाई गई, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए विशेषज्ञों की सलाह
आहार विशेषज्ञों (Dieticians) का मानना है कि यह फैसला आम जनता के हित में है:
गरिमा गोयल (आहार विशेषज्ञ): अब उपभोक्ताओं को पता होगा कि वे क्या खा रहे हैं। यह पारदर्शिता स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
कनिका मल्होत्रा: अश्वगंधा तनाव और नींद के लिए बेहतरीन है, लेकिन इसे हमेशा विशेषज्ञों की सलाह और पारंपरिक तरीके (जड़ का चूर्ण) से ही लेना चाहिए।




