Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अमेरिकी राजनीति में 'अनप्रिडिक्टेबल' माने जाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर पाकिस्तान को लेकर पूरी तरह बदल गए हैं। अपने पिछले कार्यकाल में पाकिस्तान को 'धोखेबाज' बताने वाले ट्रंप अब पाकिस्तानी नेतृत्व, विशेषकर सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने न केवल पाकिस्तान जाने की इच्छा जताई, बल्कि सेना प्रमुख मुनीर को 'फील्ड मार्शल' और 'बेहतरीन इंसान' कहकर सबको चौंका दिया। आखिर इस अचानक उमड़े प्रेम के पीछे की कूटनीति क्या है? आइए समझते हैं।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की 'नई पहचान'
ट्रंप के इस हृदय परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को टालने के लिए ट्रंप को एक ऐसे मध्यस्थ की जरूरत थी, जिसके संबंध तेहरान के साथ बेहतर हों। पाकिस्तान ने इस भूमिका को बखूबी निभाया है। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि ईरान के साथ वार्ता को सुगम बनाने में इस्लामाबाद की साझेदारी 'उत्कृष्ट' रही है। उन्होंने कहा, "अगर ईरान के साथ शांति समझौता इस्लामाबाद में फाइनल होता है, तो मैं वहां जरूर जाऊंगा।"
आसिम मुनीर: ट्रंप के नए पसंदीदा 'फील्ड मार्शल'
ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की जमकर सराहना की। ट्रंप का उन्हें 'फील्ड मार्शल' कहना उनकी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। गौरतलब है कि जिस समय ट्रंप व्हाइट हाउस में यह बयान दे रहे थे, ठीक उसी समय जनरल मुनीर तेहरान में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ से मुलाकात कर रहे थे। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात अमेरिका-ईरान के बीच 'न्यूक्लियर डील' और युद्धविराम की जमीन तैयार करने के लिए हुई थी। ट्रंप का मानना है कि मुनीर और शहबाज शरीफ के प्रयासों से ही ईरान अपने यूरेनियम भंडार को सौंपने पर विचार कर रहा है।
तेल की कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य का गणित
ट्रंप के पाकिस्तान प्रेम के पीछे अमेरिकी अर्थव्यवस्था का हित भी छिपा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान के साथ समझौता होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुल जाएगा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरेंगी। ट्रंप का सीधा लक्ष्य अमेरिकी जनता को महंगाई से राहत देना है, और इसमें पाकिस्तान एक 'की-प्लेयर' (Key-Player) बनकर उभरा है।
क्या यह केवल कूटनीतिक 'हनीमून' है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह 'प्यार' पूरी तरह से रणनीतिक है। ट्रंप अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत किसी भी ऐसे देश की प्रशंसा करने से नहीं हिचकते जो उनके लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करे। फिलहाल, ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौता (Nuclear Deal) ट्रंप की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और पाकिस्तान ने इसके लिए अपना घर (इस्लामाबाद) बातचीत की मेज के रूप में पेश किया है। यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।
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