Prabhat Vaibhav, Digital Desk : भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले नागरिकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। नेपाल सरकार द्वारा सीमावर्ती बाजारों से सामान लाने पर लगाए गए सख्त 'भंसार' (कस्टम) नियमों और ₹100 की सीमा को लेकर अब कूटनीतिक और स्थानीय स्तर पर समाधान की कोशिशें तेज हो गई हैं। सांसद की इस नई पहल से सीमावर्ती भारतीय बाजारों पर निर्भर नेपाली नागरिकों में खुशी की लहर है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
नेपाल में 14 अप्रैल (नया साल) के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती काफी बढ़ा दी गई थी।
₹100 का नियम: नेपाल सरकार के भंसार नियमों के तहत, ₹100 से अधिक मूल्य की किसी भी वस्तु को भारत से नेपाल ले जाने पर सीमा शुल्क (Duty) देना अनिवार्य कर दिया गया था।
सख्ती का असर: दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे चीनी, नमक, तेल और दाल लाने में भी स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही थी। सशस्त्र पुलिस बल (APF) द्वारा की जा रही कड़ाई के कारण आम नागरिकों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सांसद विक्रम खनाल की बड़ी पहल
भारतीय बाजारों से सामान लाने में हो रही कठिनाइयों को देखते हुए पश्चिम नवलपरासी (क्षेत्र संख्या-1) के सांसद विक्रम खनाल ने मोर्चा संभाला है।
अधिकारियों से मुलाकात: सोमवार को सांसद खनाल ने सशस्त्र पुलिस बल (APF) के जिला मुख्यालय पहुंचकर एसपी गोविंद खाती से मुलाकात की।
राहत की मांग: उन्होंने अधिकारियों को बताया कि भंसार प्रावधानों में बढ़ी सख्ती से आम जनता त्रस्त है। उन्होंने सुरक्षा निकायों से आग्रह किया कि कानून के दायरे में रहते हुए स्थानीय नागरिकों को आवश्यक सामग्री लाने में सहूलियत दी जाए और अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न न की जाएं।
भारतीय बाजारों और नागरिकों पर प्रभाव
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर, ठोरी और अन्य नजदीकी बाजारों का व्यापार पूरी तरह नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है।
बाजारों में सन्नाटा: नियमों की सख्ती के कारण भारतीय बाजारों में भी ग्राहकों की कमी देखी जा रही थी।
स्थानीय वार्ता: सांसद की इस पहल के बाद सुरक्षा बलों और प्रशासन के बीच समन्वय बनाने पर सहमति बनी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ₹100 की इस न्यूनतम सीमा में ढील दी जा सकती है या दैनिक उपभोग की वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
सीमावर्ती विवाद और राजनीति
नेपाल के भीतर हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और प्रधानमंत्री बालेन शाह (स्थानीय राजनीति में सक्रिय नाम) के समय में सीमा प्रबंधन को लेकर नए निर्देश जारी हुए थे। हालांकि, आम नागरिकों के बढ़ते आक्रोश और आर्थिक दिक्कतों को देखते हुए अब प्रशासन नरम रुख अपनाने के संकेत दे रहा है।
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