Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की मिट्टी अब केवल अनाज ही नहीं, बल्कि बेशकीमती फल और उद्यानिकी फसलें उगलने के लिए तैयार है। राजधानी पटना में आयोजित दो दिवसीय 'क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम' (Cluster Development Program) कार्यशाला के दौरान बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बागवानी के क्षेत्र में निवेश करने वाले किसानों और उद्यमियों के लिए बड़ी घोषणाएं कीं। सरकार का लक्ष्य शाही लीची, मिथिला मखाना और जर्दालु आम जैसे 'जीआई टैग' प्राप्त उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाना और किसानों की आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करना है।
क्लस्टर आधारित खेती: निवेश पर मिलेगी भरपूर सब्सिडी
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार में उद्यान (Horticulture) के क्षेत्र में निवेश करने वालों को सरकार हर संभव तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित खेती से न केवल लागत कम होगी, बल्कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन से किसानों को अपनी फसलों का बेहतर दाम मिल सकेगा।
किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए 'स्पेशल क्लस्टर' तैयार
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल के अनुसार, विभाग अब ऐसी फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो कम समय में अधिक मुनाफा देती हैं। इसके लिए पूरे राज्य को विभिन्न क्लस्टर में विभाजित किया गया है:
सब्जी क्लस्टर: पटना, वैशाली और समस्तीपुर जिलों को सब्जी उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मखाना क्लस्टर: कोसी और मिथिलांचल के इलाकों में मखाना की खेती और इसकी प्रोसेसिंग के लिए विशेष क्लस्टर बनाए गए हैं।
स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट: रोहतास और कैमूर जैसे क्षेत्रों में अब पारंपरिक खेती के बजाय स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी नकदी फसलों (Cash Crops) के क्लस्टर काम कर रहे हैं।
बैंकों और निवेशकों का मिलेगा साथ
इस कार्यशाला में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, प्रमुख बैंक और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी शामिल हुए। उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने बताया कि निवेशकों और बैंकों की सहभागिता से किसानों को नई तकनीक और आसान ऋण की सुविधा मिल सकेगी, जिससे बिहार के बागवानी उत्पादों की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।




