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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पीठ दर्द को हम अक्सर थकान, गलत पोस्चर या भारी सामान उठाने का परिणाम मानकर टाल देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पीठ का यह दर्द साइलेंट किलर 'किडनी फेलियर' का शुरुआती संकेत भी हो सकता है? चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मांसपेशियों के दर्द और गुर्दे (Kidney) के दर्द के बीच एक बारीक अंतर होता है, जिसे समय रहते पहचानना आपकी जान बचा सकता है।

मांसपेशियों का दर्द बनाम किडनी का दर्द: कैसे पहचानें अंतर?

ज्यादातर लोग पीठ दर्द होने पर पेनकिलर या स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन डॉ. रतन झा के अनुसार, किडनी से संबंधित दर्द का व्यवहार काफी अलग होता है।

मांसपेशियों का दर्द: यह आमतौर पर चलने-फिरने या झुकने पर बढ़ता है और आराम करने या सिकाई करने पर कम हो जाता है।

किडनी का दर्द: यह दर्द पीठ के निचले हिस्से या पसलियों के ठीक नीचे 'बगल' (Flanks) में गहराई में महसूस होता है। यह दर्द लगातार बना रहता है और आराम करने या पोजीशन बदलने से भी कम नहीं होता।

किडनी खराब होने के 5 'रेड फ्लैग' लक्षण

डॉ. हिमा दीप्ति अल्लाह बताती हैं कि किडनी की समस्या हमेशा अचानक नहीं आती। शरीर धीरे-धीरे ये 5 संकेत देने लगता है:

पेशाब के पैटर्न में बदलाव: पेशाब में झाग आना, बार-बार पेशाब महसूस होना या पेशाब का रंग गहरा (चाय जैसा) होना।

शरीर में सूजन: सुबह उठने पर आंखों के नीचे पफनेस या पैरों और टखनों में सूजन दिखना।

लगातार थकान: जब किडनी खून को साफ नहीं कर पाती, तो शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे हर वक्त थकान और भारीपन महसूस होता है।

त्वचा में खुजली और सूखापन: रक्त में मिनरल्स का संतुलन बिगड़ने से त्वचा में गंभीर खुजली हो सकती है।

ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव: अचानक हाई बीपी की समस्या होना भी किडनी की कार्यक्षमता बिगड़ने का लक्षण है।

क्यों खतरनाक है इसे नजरअंदाज करना?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) के आंकड़ों के मुताबिक, क्रोनिक किडनी रोग (CKD) के लक्षण शुरुआती चरणों में इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें आम कमजोरी समझ लेते हैं। जब तक दर्द गंभीर होता है, तब तक किडनी काफी हद तक डैमेज हो चुकी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीठ दर्द के साथ-साथ आपको भूख न लगना, मतली या सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय

अपनी जीवनशैली में छोटे बदलाव करके आप किडनी फेलियर के खतरे को टाल सकते हैं:

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं लेकिन ओवरहाइड्रेशन से बचें।

बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक पेनकिलर (Painkillers) का सेवन न करें।

नमक और प्रोसेस्ड शुगर की मात्रा कम करें।

नियमित रूप से ब्लड शुगर और बीपी की जांच करवाएं।