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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : सांस लेना जीवन की सबसे स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके सांस लेने का 'तरीका' आपकी उम्र और ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है? अगर आप अक्सर नाक के बजाय मुंह से सांस लेते हैं, तो यह केवल एक सामान्य आदत नहीं बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोते समय या दिन भर मुंह से सांस लेने की आदत शरीर के ऊर्जा स्तर को सोख लेती है और आपको कई बीमारियों का शिकार बना सकती है।

नाक कुदरती फिल्टर, तो मुंह से सांस लेना क्यों है 'असामान्य'?

बेंगलुरु स्थित SDMIAH की सहायक प्रोफेसर डॉ. समहिता उल्लोड के अनुसार, हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से नाक से सांस लेने के लिए डिजाइन किया गया है। नाक केवल हवा का रास्ता नहीं है, बल्कि यह एक 'नेचुरल एयर प्यूरीफायर' है जो हवा को शरीर के तापमान के अनुसार गर्म करती है, उसमें नमी जोड़ती है और धूल-मिट्टी के कणों को फेफड़ों तक जाने से रोकती है।

जब हम मुंह से सांस लेते हैं, तो ठंडी, सूखी और बिना फिल्टर की हुई हवा सीधे फेफड़ों में प्रवेश करती है, जिससे श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर बुरा दबाव पड़ता है।

पूरी रात सोने के बाद भी थकान? यह है असली वजह

अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि वे 8 घंटे की नींद के बाद भी सुबह थका हुआ महसूस करते हैं। डॉ. उल्लोड बताती हैं कि मुंह से सांस लेने के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे:

ऊर्जा का उत्पादन कम होता है: शरीर के सेल्स को सही मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने से ऊर्जा स्तर गिर जाता है।

एकाग्रता में कमी: मस्तिष्क को पूरी ऑक्सीजन न मिलने से याददाश्त और फोकस पर असर पड़ता है।

स्लीप एपनिया का खतरा: यह आदत नींद को टुकड़ों में बांट देती है और 'स्लीप एपनिया' जैसी खतरनाक स्थिति को और बिगाड़ सकती है।

बच्चों के लिए अधिक घातक: चेहरे की बनावट तक बदल सकती है

मुंह से सांस लेने की आदत बच्चों के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक है। लंबे समय तक ऐसा करने से बच्चों के चेहरे की बनावट (Facial Structure) बदल सकती है, दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं और उनके बैठने-चलने के तरीके (Posture) पर भी बुरा असर पड़ता है।

कैसे पहचानें लक्षण और क्या है समाधान?

अगर आप सुबह उठते ही सूखे होंठ, बार-बार प्यास लगना, गले में खराश या भारीपन महसूस करते हैं, तो समझ जाइए कि आप सोते समय मुंह से सांस ले रहे हैं।

बचाव के उपाय:

कारण का इलाज: अगर नाक बंद, एलर्जी या साइनस है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्राणायाम: योग और श्वास संबंधी व्यायाम (Breathing Exercises) से नाक से सांस लेने की आदत फिर से डाली जा सकती है।

शारीरिक गतिविधि: सक्रिय रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन तंत्र सुधरता है।