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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आजकल युवाओं में फिट दिखने और सिक्स-पैक एब्स पाने का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस जुनून के बीच एक डरावना सच यह भी है कि जिम में कसरत के दौरान अचानक होने वाली मौतों और हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। सेहत बनाने की जगह कहीं आप अपनी जान जोखिम में तो नहीं डाल रहे? आइए समझते हैं इस गंभीर खतरे के पीछे की असली वजहें और कसरत करने का सुरक्षित तरीका।

युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के 5 मुख्य कारण

फिटनेस विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, जिम में होने वाली दुर्घटनाएं अक्सर लापरवाही और जानकारी के अभाव में होती हैं:

अचानक भारी वर्कआउट (Ego Lifting): कई युवा जिम जाते ही बिना किसी तैयारी के भारी वजन उठाने लगते हैं। जब शरीर तैयार न हो और दिल पर अचानक अतिरिक्त दबाव पड़े, तो यह कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकता है।

सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का जाल: जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना डॉक्टरी सलाह के एनर्जी ड्रिंक्स, प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट और स्टेरॉयड लेना सबसे ज्यादा जानलेवा है। ये हृदय गति (Heart Rate) को असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं।

आंतरिक बीमारियों की अनदेखी: कई बार युवाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर या ब्लॉकेज की समस्या है। ऐसी स्थिति में भारी व्यायाम 'साइलेंट किलर' बन जाता है।

निर्जलीकरण (Dehydration): पसीने के जरिए शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। इनकी कमी होने पर खून गाढ़ा होने लगता है और दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती हैं।

नींद और आराम की कमी: शरीर को रिकवरी के लिए 7-8 घंटे की नींद चाहिए। यदि आप थके हुए शरीर के साथ जिम जाते हैं, तो आप सीधे तौर पर दिल को खतरे में डाल रहे हैं।

व्यायाम का सही समय: सुबह या शाम?

व्यायाम का समय आपकी बॉडी क्लॉक पर निर्भर करता है, लेकिन दोनों के अपने फायदे हैं:

सुबह का समय: मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए बेहतरीन है। लेकिन ध्यान रहे, सुबह शरीर की मांसपेशियां अकड़ी होती हैं, इसलिए वार्म-अप के बिना भारी वजन न उठाएं।

शाम का समय: शाम तक शरीर का तापमान और लचीलापन (Flexibility) बेहतर होता है, जिससे चोट लगने का खतरा कम रहता है। यह दिन भर के मानसिक तनाव को कम करने के लिए अच्छा है।

वर्कआउट के दौरान इन 'डेंजर सिग्नल' को न करें नजरअंदाज

यदि कसरत करते समय आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत रुक जाएं:

सीने में भारीपन या दर्द होना।

अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना या चक्कर आना।

सांस फूलना या दिल की धड़कन का बहुत ज्यादा तेज होना।

जबड़े, गर्दन या बाएं हाथ में दर्द का फैलना।

सुरक्षित जिम रूटीन के लिए 'गोल्डन रूल्स'

मेडिकल चेकअप: जिम शुरू करने से पहले एक बार अपना ईसीजी (ECG) और ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराएं।

वार्म-अप और कूल-डाउन: कसरत से पहले 10 मिनट शरीर को गर्म करें और अंत में स्ट्रेचिंग जरूर करें।

सांस न रोकें: वजन उठाते समय कभी भी सांस न रोकें, इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है।

प्रोफेशनल की सलाह: हमेशा सर्टिफाइड ट्रेनर की देखरेख में ही वर्कआउट करें।