Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के लाखों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधान परिषद में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि प्राथमिक स्कूलों के स्नातक ग्रेड (Graduate Grade) और प्रधानाध्यापकों (Principals) के अंतर-जिला स्थानांतरण (Inter-District Transfer) पर सरकार बेहद गंभीर है। लंबे समय से अपने गृह जिले या मनचाही जगह तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी उम्मीद की किरण है।
स्नातक ग्रेड शिक्षकों के तबादले पर सरकार का ग्रीन सिग्नल
प्रो. नवल किशोर यादव द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि सरकार पुराने वेतनमान वाले स्नातक ग्रेड और प्रधानाध्यापकों के तबादले को लेकर सकारात्मक विचार कर रही है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि राज्य में अब तक लगभग ढाई लाख शिक्षकों का तबादला सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जिसमें 80 प्रतिशत तक शिक्षक संतुष्ट हैं।
संतुलित और निरंतर रहेगी तबादला प्रक्रिया
शिक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि शिक्षकों का तबादला कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया (Continuous Process) है। जिला कमेटियां स्कूलों में छात्रों के अनुपात (Teacher-Student Ratio) और रिक्त पदों का आकलन कर तबादले की प्रक्रिया को जारी रखेंगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य उन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है, जहां बच्चों की संख्या अधिक है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के बकाये का जल्द होगा भुगतान
सदन में मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के कर्मियों के वेतन पुनरीक्षण की बकाया राशि का मुद्दा भी गूंजा। संजय कुमार सिंह के सवाल पर मंत्री ने स्वीकार किया कि मदरसा स्कूलों के लिए 571 करोड़ और संस्कृत विद्यालयों के लिए 411 करोड़ रुपये का प्रावधान होने के बावजूद भुगतान लंबित है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वित्त विभाग से समन्वय कर मार्च तक यह राशि जारी करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
आकस्मिक अवकाश (CL) नियमों में सुधार का आश्वासन
शिक्षकों के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मंत्री ने कहा कि आकस्मिक अवकाश की गणना में आ रही विसंगतियों को दूर किया जाएगा। वर्तमान में अवकाश के बीच आने वाले रविवार या सार्वजनिक छुट्टियों को भी गिना जा रहा था, जो कि नियमों के विपरीत था। शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि अवकाश गणना को अधिक व्यावहारिक और न्यायसंगत बनाने के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।




