Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के न्यायिक इतिहास में 26 फरवरी 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। पटना हाईकोर्ट अब अपनी अब तक की सबसे बड़ी न्यायिक क्षमता के साथ कार्य करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नौ नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद, हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या 46 तक पहुंच जाएगी। यह न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि राज्य की न्याय प्रणाली को सशक्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भी है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मुहर: 9 नए चेहरे संभालेंगे कमान
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की हालिया बैठक में बिहार के नौ अनुभवी अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इन नामों में मो. नदीम सिराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजिश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह तथा विकास कुमार शामिल हैं। केंद्र सरकार से अधिसूचना जारी होते ही ये सभी न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।
87% क्षमता के साथ चलेगा न्याय का पहिया
पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 स्वीकृत पद हैं। नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत जजों की संख्या 46 हो जाएगी, जिसका अर्थ है कि अदालत अपनी कुल क्षमता के लगभग 87 प्रतिशत बल के साथ काम करेगी। यह पहली बार है जब हाईकोर्ट इतनी बड़ी संख्या में न्यायाधीशों के साथ सुनवाई करेगा। इससे वर्षों से लंबित पड़े लाखों मुकदमों के निष्पादन में अभूतपूर्व तेजी आने की उम्मीद है।
रिटायरमेंट से पहले न्यायिक सुदृढ़ीकरण
वर्ष 2026 पटना हाईकोर्ट के लिए बदलाव का साल है, क्योंकि इस वर्ष तीन वरिष्ठ न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो रहे हैं:
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू: 4 जून 2026
न्यायाधीश नवनीत कुमार पांडेय: 28 फरवरी 2026
न्यायाधीश बिबेक चौधरी: 31 अक्टूबर 2026
इन महत्वपूर्ण सेवानिवृत्तियों से पहले 9 नए जजों की नियुक्ति ने न्यायिक निरंतरता को सुनिश्चित कर दिया है, जिससे अदालती कामकाज की गति प्रभावित नहीं होगी।
विधि जगत में जश्न: 'न्याय अब होगा और सुलभ'
इस ऐतिहासिक फैसले का बार और विधि जगत ने पुरजोर स्वागत किया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और महाधिवक्ता पी.के. शाही समेत कई कानूनी दिग्गजों ने इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से 'जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड' (देर से मिला न्याय, न्याय न मिलने के बराबर है) वाली स्थिति बदलेगी और आम जनता को समय पर न्याय मिल सकेगा।




