मधुबनी में बेकाबू हुआ लोगों का गुस्सा, DM आनंद शर्मा का महिलाओं ने पकड़ा कॉलर; SP के सामने हुई तीखी नोकझोंक
बिहार के मधुबनी जिले में कानून-व्यवस्था और स्थानीय आक्रोश का एक ऐसा रूप देखने को मिला जिसने प्रशासनिक महकमे की नींव हिलाकर रख दी है। इलाके में घटी एक अप्रिय घटना के बाद भड़के जनआक्रोश को शांत करने पहुंचे अधिकारियों को खुद बेहद विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी यानी डीएम आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक (SP) जब भारी दलबल के साथ स्थिति का जायजा लेने पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर था। स्थिति इस कदर अनियंत्रित हो गई कि आक्रोशित महिलाओं ने डीएम आनंद शर्मा का कॉलर तक पकड़ लिया और पुलिस बल के सामने जमकर नारेबाजी की। वहीं, एसपी के सामने ही अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया है और पुलिस-प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मच गया है।
मधुबनी में अचानक क्यों भड़का लोगों का गुस्सा?
मधुबनी जिले के इस इलाके में तनाव की शुरुआत एक स्थानीय विवाद और कथित पुलिसिया ढिलाई के बाद हुई, जिसके कारण ग्रामीणों का गुस्सा धीरे-धीरे सुलग रहा था। जैसे ही घटना की खबर फैली, सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और खासकर महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। आक्रोशित लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। देखते ही देखते मुख्य मार्ग को जाम कर दिया गया और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई। भीड़ का आरोप था कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
जब डीएम आनंद शर्मा की गाड़ी को महिलाओं ने घेरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी आनंद शर्मा खुद घटनास्थल के लिए रवाना हुए। उनके साथ भारी पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। डीएम का मकसद लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराना और मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना था। लेकिन जैसे ही डीएम आनंद शर्मा की गाड़ी मौके पर पहुंची, पहले से उग्र भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। महिलाओं ने गाड़ी के आगे आकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जब डीएम संवाद स्थापित करने के लिए नीचे उतरे, तो आक्रोशित महिलाओं ने उनसे तीखे सवाल किए। इसी बीच धक्का-मुक्की का माहौल बन गया और गुस्साई महिलाओं ने डीएम का कॉलर पकड़ लिया, जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।
SP की मौजूदगी में होती रही तीखी नोकझोंक और हंगामा
जिलाधिकारी के साथ हुई इस धक्का-मुक्की के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) भी मौके पर मौजूद थे। एसपी और उनकी टीम ने तुरंत सुरक्षा घेरा बनाते हुए डीएम को भीड़ से अलग करने की कोशिश की, लेकिन लोग इतने गुस्से में थे कि वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे। एसपी की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही। स्थानीय महिलाओं और युवाओं का कहना था कि जब तक उनकी मांगों को तुरंत पूरा नहीं किया जाता और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। मौके पर स्थिति इतनी नाजुक हो गई थी कि जरा सी चूक से बड़ा लाठीचार्ज या बवाल हो सकता था।
अतिरिक्त पुलिस बल तैनात, छावनी में तब्दील हुआ इलाका
डीएम और एसपी के साथ हुई इस अभद्रता और तीखी बहस के बाद जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहन और महिला पुलिसकर्मियों की टुकड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया। सुरक्षा बलों ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को पीछे धकेला और अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। फिलहाल पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और आला अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पुलिस कर रही वीडियो फुटेज की जांच, दर्ज होगी प्राथमिकी
घटना के बाद पुलिस प्रशासन अब सख्त कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और पुलिस के कैमरों में कैद हुई वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने जिलाधिकारी के साथ बदसलूकी की, कॉलर पकड़ा और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन का हक सभी को है, लेकिन किसी प्रशासनिक अधिकारी पर शारीरिक हमला करना या कानून हाथ में लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक विफलता पर उठ रहे सवाल और आगे का रुख
इस पूरी घटना ने मधुबनी जिले में प्रशासनिक संवाद और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस वाकये की तीखी चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जनता की शिकायतों का सही समय पर निवारण किया जाता, तो बात इतनी आगे नहीं बढ़ती कि डीएम और एसपी को खुद इस तरह के जनआक्रोश का सामना करना पड़ता। फिलहाल जिला प्रशासन इलाके में शांति बहाली के प्रयास में जुटा है और पीड़ित पक्ष से बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि माहौल को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।