'मंगल पांडेय से प्रशांत किशोर का क्या रिश्ता है', डस्टबिन घोटाले में नाम उछालने के बाद तेजस्वी का PK पर पलटवार
बिहार की राजनीति में इन दिनों बयानों का दौर पूरी तरह से गर्माया हुआ है और एक के बाद एक खुलासे सियासी तापमान को और बढ़ा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर यानी पीके के उस बयान पर तीखा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने तेजस्वी पर डस्टबिन घोटाले में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया था। तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर प्रशांत किशोर और भाजपा के वरिष्ठ नेता व मंत्री मंगल पांडेय के रिश्तों पर सवाल खड़े करते हुए एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि आखिर प्रशांत किशोर का मंगल पांडेय और भारतीय जनता पार्टी से अंदरखाने क्या रिश्ता है, जो वह लगातार भाजपा के इशारों पर उनकी पार्टी और परिवार पर निशाना साधते रहते हैं।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला और पीके की नीयत पर सवाल
राजनीतिक गलियारों में इस समय यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है कि आखिर प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव के बीच जुबानी जंग इस हद तक क्यों पहुंच गई है। तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पीके कोई स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक या निष्पक्ष व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वह पर्दे के पीछे से एनडीए और खासकर बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। तेजस्वी का यह दावा है कि प्रशांत किशोर का मुख्य एजेंडा सिर्फ और सिर्फ आरजेडी और उनके परिवार को बदनाम करना है ताकि बिहार की जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या सरकार की नाकामी छुपानी होती है, तब ऐसे किरदारों को मैदान में उतार दिया जाता है ताकि बेवजह का शोर मचाया जा सके और विरोधी दलों पर कीचड़ उछाला जा सके। तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि डस्टबिन घोटाले से उनका या उनके किसी भी करीबी का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है और यह उनके ऊपर लगाए गए पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित आरोप हैं।
डस्टबिन घोटाला विवाद और बिहार की सियासी हलचल
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जन सुराज पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए पिछली सरकारों के दौरान हुए कथित डस्टबिन घोटाले में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा किया था। पीके का आरोप था कि जब राज्य में महाठबंधन या आरजेडी समर्थित सरकारें थीं, तब कई ऐसे टेंडर और योजनाएं चलाई गईं जिनमें भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं और जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को पानी की तरह बहा दिया गया। इसी बयान के बाद से बिहार की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां प्रशांत किशोर लगातार सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन के मुद्दों के साथ-साथ भ्रष्टाचार को लेकर आरजेडी और जेडीयू दोनों को घेर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने पीके की विश्वसनीयता पर ही बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर का अतीत इस बात का गवाह है कि वह पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिकार का काम करते थे और अब खुद पार्टी बनाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। बिहार की जनता इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को बहुत करीब से देख रही है और आने वाले समय में यह जुबानी जंग राज्य के चुनावी समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकती है, क्योंकि दोनों ही नेता एक-दूसरे को घेरने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं।